उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ला और सहजनवा से भाजपा विधायक शीतल पांडेय समेत दस अन्य के खिलाफ एक मामले को वापस लेने का फैसला किया है. यह मामला गोरखपुर की एक अदालत में चल रहा है. प्रदेश सरकार ने गोरखपुर के जिला अधिकारी को इसके लिए चिट्ठी भी लिखी है. सरकार के मुताबिक तमाम तथ्यों की जांच के बाद यह फैसला लिया गया है.

साल 1995 में गोरखपुर के पीपीगंज थाने में दर्ज इस मामले में योगी समेत अन्य लोगों पर धारा 144 (निषेधाज्ञा) के उल्लंघन का आरोप लगा था. मामला गोरखपुर की स्थानीय अदालत पहुंचा तो उसने इन सभी आरोपितों के ​खिलाफ गैर जमानती वारंट निकालने के आदेश दिए गए थे. हालांकि उस वक्त वारंट जारी नहीं हुए थे.

उत्तर प्रदेश में ऐसे अनेक मामले दर्ज हैं. इसके लिए योगी आदित्यनाथ ने 21 दिसंबर को सदन में यह कहते हुए दंड संहिता संशोधन विधेयक 2017 पेश किया था कि राजनीतिक स्वार्थों के चलते पहले की राज्य सरकारों ने बीते वर्षों के दौरान जनप्रतिनिधियों पर 20 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए. उनका कहना था कि ये मामले वापस लिए जाएंगे.