कर्नाटक में बीते पांच साल में 3,515 किसानों ने खुदकुशी की. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार यह आंकड़ा अप्रैल 2013 से नवंबर 2017 के बीच का है. राज्य के कृषि विभाग ने बताया कि इनमें से 2,525 किसानों ने सूखे और फसलें खराब होने की वजह से खुदकुशी जैसा कदम उठाया. कृषि विभाग ने यह भी कहा कि अप्रैल 2008 से अप्रैल 2012 के बीच 1,125 किसानों ने आत्महत्या की थी.

कर्नाटक के कृषि विभाग के मुताबिक अप्रैल 2015 से अप्रैल 2017 के बीच खुदकुशी के 2,514 मामले दर्ज किए गए जिनमें से 1,929 मामलों को किसानों से जुड़ा माना गया. इसी तरह अप्रैल 2017 से नवंबर 2017 के बीच, जब राज्य में पर्याप्त बारिश हुई थी, खुदकुशी के 624 मामले दर्ज हुए, जिनमें से 416 मामलों को किसानों की खुदकुशी माना गया.

कृषि निदेशक बीवाई श्रीनिवास ने बताया कि खुदकुशी करने वालों में गन्ना किसानों की संख्या सबसे ज्यादा है. इसके बाद कपास और धान के किसान हैं. उन्होंने आगे कहा कि कर्ज लौटाने के लिए किसानों पर दबाव न बनाने, ब्याज माफ करने और कर्ज की अवधि बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए हैं. वहीं, कृषि अधिकारी कुमारस्वामी ने बताया कि किसानों को 30 से 40 फीसदी ब्याज दर पर कर्ज देने वाले सूदखोरों के खिलाफ सख्ती की जा रही है. उनके मुताबिक बीते तीन साल में 1,332 सूदखोरों के खिलाफ मामले दर्ज किया गया और इनमें से 585 की गिरफ्तारी की गई.