अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र संघ को दी जाने वाली बजटीय सहायता में कटौती का प्रस्ताव दिया है. संयुक्त राष्ट्र के अमेरिकी मिशन ने इस बारे में बताया है कि वह वित्त वर्ष 2018-19 में यूएन के बजट में 28.5 करोड़ डॉलर से ज्यादा की कटौती करेगा. यूएन के बजट का अधिकांश उसके सदस्य देशों से मिलने वाली आर्थिक अंशदान से तैयार होता है. लेकिन यह ऐलान इसलिए अहम है कि संयुक्त राष्ट्र के बजट में अमेरिकी सहयोग का हिस्सा 22 फीसदी तक है.

जानकारों के अनुसार यरुशलम को इजराइल की राजधानी बनाने का विरोध करने के चलते डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने यूएन को दी जाने वाली बजटीय सहायता घटाने का फैसला किया है. ऐसा इसलिए क्योंकि उस प्रस्ताव पर मतदान के बाद संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने कहा था कि हम इस घटना को उस वक्त याद रखेंगे जब ज्यादा आर्थिक या राजनीतिक सहयोग देने की मांग की जाएगी.

हालांकि निक्की हेली ने मंगलवार को कहा कि इसका कारण यूएन की अक्षमता और शाहखर्ची है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका यूएन को अपनी उदारता का फायदा नहीं उठाने देगा. उन्होंने इस वैश्विक संस्था में सुधार लाने की वकालत भी की और कहा कि अमेरिका अपने हितों की सुरक्षा करने के साथ यूएन की क्षमता बेहतर करने के उपाय खोजेगा.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा में पिछले हफ्ते यरुशलम को इजराइल की राजधानी घोषित करने के अमेरिकी निर्णय का बहुमत से विरोध किया गया. मतदान में 128 सदस्यों ने अमेरिकी रुख का विरोध किया जबकि केवल नौ देशों ने ही उसका समर्थन किया था. अमेरिका के इस फैसले का दुनिया के कई देशों में भी काफी विरोध हुआ है.