लोकसभा ने गुरुवार को ‘तीन तलाक़’ को अपराध घोषित करने वाला विधेयक लंबी चर्चा के बाद ध्वनिमत से पास हो गया. वहीं विधेयक में संशोधन के लिए दिए गए सभी 19 प्रस्ताव खारिज कर दिए गए हैं. लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने इसके पारित होने का ऐलान करते हुए सदन को कल तक के लिए स्थगित कर दिया है. अब इस विधेयक को संसद के उच्च सदन राज्यसभा को भेजा जाएगा. हालांकि राज्यसभा में इस विधेयक को पास कराना मोदी सरकार के लिए आसान नहीं होगा.

इससे पहले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मुस्लिम महिला विवाह (अधिकारों की सुरक्षा) विधेयक, 2017 सदन में पेश किया. इस मौके पर उन्होंने कहा, ‘आज का दिन ऐतिहासिक है. हम आज इतिहास बना रहे हैं. यह कानून महिलाओं के सम्मान के लिए है. उन्हें न्याय और समानता का अधिकार देने के लिए है. इसे किसी संप्रदाय या समुदाय से संबंधित नहीं समझा जाना चाहिए.’

एनडीटीवी के मुताबिक बिल पेश करते हुए प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक़ को ‘अवैध-असंवैधानिक’ घोषित किए जाने के बावज़ूद यह प्रथा जारी है. लिहाज़ा इस पर रोक के लिए सख़्त कानून जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने इस साल अगस्त में अपने ऐतिहासिक फ़ैसले में ‘तीन तलाक़’ (तलाक़-ए-बिद्दत या एक ही बार में तीन बार तलाक़ बोलकर शादी तोड़ देना) को अवैध बता दिया था. साथ ही उसने सरकार से इसके ख़िलाफ़ कानून बनाने को कहा था.

हालांकि संसद में तीन तलाक़ को अपराध घोषित करने संबंधी विधेयक का कई पार्टियों ने विरोध किया. इनमें राजद (राष्ट्रीय जनता दल), एआईएमआईएम (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन), बीजद (बीजू जनता दल) और एआईएमएल (ऑल इंडिया मुस्लिम लीग) प्रमुख हैं. इन दलों ने कहा है कि विधेयक लाने के बारे में मुस्लिम समुदाय से चर्चा नहीं की गई. उनके मुताबिक यह संविधान में नागरिकों को मिले समानता के अधिकार का भी उल्लंघन है. कांग्रेस ने भी इसमें कई खामियों का जिक्र करते हुए विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की थी.

वैसे इस विधेयक के अनुसार कानून का उल्लंघन करने वालाें को तीन साल की कैद और जुर्माने की सजा दी जा सकती है. इसमें महिलाओं को तीन तलाक़ के ख़िलाफ़ अदालत में जाने का अधिकार दिया गया है. अदालत में वे तलाक़ वे अपने बच्चों की कस्टडी और भरण-पोषण की मांग कर सकती हैं. इस विधेयक में यह बंदोबस्त भी है कि तीन तलाक़ की पीड़ित महिला अगर मांग करे तो उसके बच्चों के पालन-पोषण का जिम्मा उसे ही मिलेगा, पति को नहीं. इस विधेयक का मसौदा केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले एक अंतर-मंत्री समूह ने तैयार किया है.