इन दोनों घटनाओं का आपस में कोई संबंध हो भी सकता है या शायद न भी हो. लेकिन हैं दोनों दिलचस्प. तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत जयललिता की सहयोगी रहीं शशिकला के साथ केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की खींचतान अब जगजाहिर है. और मौजूदा दोनों घटनाएं उसी खींचतान की अगली कड़ी लगती हैं. इनमें से एक से यह ख़ुलासा हुआ है कि शशिकला ने इन दिनों ‘मौन व्रत’ ले रखा है. जबकि दूसरी से संकेत मिला है कि राज्य की सत्ता संभाल रही मुख्यमंत्री ईके पलानिसामी (ईपीएस) और उपमुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम (ओपीएस) की एआईएडीएमके (अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) में भाजपा के ख़िलाफ़ आवाज उठने लगी है.

द एशियन एज़ के मुताबिक जयललिता की आरके नगर विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतने के बाद शशिकला के भतीजे टीटीवी दिनाकरण बेंगलुरू की केंद्रीय जेल पहुंचे. यहां पिछले साल आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद से शशिकला चार साल की सजा भुगत रही हैं. उनसे मुलाकात के बाद दिनाकरण ने मीडिया से बात करते हुए जानकारी दी, ‘शशिकला ने इन दिनों मौन व्रत ले रखा है. जयललिता की बरसी (बीती पांच दिसंबर) से उन्होंने यह व्रत लिया हुआ है.’ हालांकि उन्होंने न तो इसकी वजह बताई और न ही यह कि मौन व्रत कब तक जारी रहेगा. लेकिन सूत्र बताते हैं कि यह व्रत जनवरी के अंत तक जारी रह सकता है.

वहीं डेक्कन क्रॉनिकल के अनुसार तमिलनाडु के राजस्व मंत्री सेलूर के राजू ने एक बार शशिकला-दिनाकरण की तारीफ़ की है. और इस बार यह तारीफ़ कोरी नहीं बल्कि भाजपा के विरोध के साथ चस्पा है. राजू ने आरके नगर विधानसभा उपचुनाव में दिनाकरण की जीत पर बुधवार को मदुरै में मीडिया के सामने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, ‘दिनाकरण इसलिए हीरो बनकर उभरे क्याेंकि उन्हाेंने जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) और ऐसे अन्य कारणों से भाजपा का विरोध किया. इससे आरके नगर विधानसभा क्षेत्र में उन्हें खूब जनसमर्थन मिला. इसलिए अब हमें (एआईएडीएमके को) भी भाजपा से कोई गठबंधन नहीं करना चाहिए. बल्कि स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए.’

यहां दो बातें याद दिलाते चलें कि शशिकला जब अपने बीमार पति एम नटराजन को देखने पांच दिन की पैरोल पर जेल से बाहर आई थीं तब भी राजू ने उनकी खुले तौर पर तारीफ़ की थी. जबकि लगभग उसी समय के आसपास मुख्यमंत्री ईपीएस ने संकेत दिया था कि आगामी चुनाव में उनकी पार्टी भाजपा से गठबंधन कर सकती है. अब भी उनकी सरकार में राजेंद्र बाला जी जैसे कुछ मंत्री भाजपा से गठबंधन के पक्षधर हैं. बाला जी ने कहा भी है, ‘भाजपा इस वक़्त देश के 19 राज्यों में सरकार चला रही है. उससे गठबंधन में कोई बुराई नहीं है. इससे पहले भी एआईएडीएमके और डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) दोनों ही भाजपा के साथ गठबंधन कर चुकी हैं.’