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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हुए अपराधों में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है. यह वीडियो रिपोर्ट बताती है कि राज्य का यह स्टेटस तब है, जब हजारों मामले थाने तक नहीं पहुंच पाते. खबर लहरिया की यह वीडियो रिपोर्ट बुंदेलखंड में हर साल दहेज या बलात्कार का शिकार होकर मारी जाने वाली महिलाओं की मौत और उसके बाद की कहानी दिखाती है. वीडियो यह भी इशारा देता है कि इस इलाके में एक महिला की जान की कीमत कितनी आंकी जाती है! यानी कि कैसे शादीशुदा महिलाओं की हत्या करने के बाद उनके मायके और ससुराल वाले सिर्फ दहेज की रकम वापस ले-देकर समझौता कर लेते हैं. लगभग यही हाल बलात्कार का शिकार होने वाली महिलाओं का भी है. इनमें आरोपित दबंगई या पैसे के बल पर मामला रफा-दफा करवा लेते हैं.

‘लाश पर समझौता’ टाइटल से बना यह वीडियो बुंदेलखंड की डराने वाली सच्चाई दिखाता है. यह सच और भी भयावह तब लगने लगता है जब आपको पता चलता है कि खुद अपराध के शिकार बहुत से लोगों के लिए ये घटनाएं अपराध हैं ही नहीं! उनके लिए ‘इज्जत’ और रोजगार को बनाए रखना, किसी महिला की जिंदगी से कहीं ज्यादा जरूरी है. इसीलिए वे किसी तरह की कानूनी कार्रवाई के बजाय इस तरह के एकतरफा समझौतों को तरजीह देते नजर आते हैं.

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पिछले दिनों क्रिकेटर विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा की शादी-रिसेप्शन की खबरें कई दिनों तक मीडिया में छाई रहीं. इस दौरान इन दोनों हस्तियों के प्रशंसकों तक लगातार यह जानकारी भी पहुंचती रही कि किस मौके पर उन्होंने क्या पहना, उन कपड़ों-गहनों को किसने डिजाइन किया और उनकी कीमत क्या थी. इस दौरान दिल्ली में हुए रिसेप्शन पर अनुष्का द्वारा पहनी गई साड़ी ने सबसे ज्यादा चर्चाएं बटोरी थी. इसकी एक वजह यह थी कि यह लाल रंग की, सुनहरी एम्ब्रॉयडरी वाली बनारसी साड़ी भारतीय दुल्हनों की पहचान है और ज्यादातर आम महिलाएं शादी के बाद इस तरह की साड़ियां पहने नजर आती हैं. फिलहाल अनुष्का शर्मा के इस साड़ी को पहनने के बाद से यह साड़ी अब फैशन स्टेटमेंट बन गई है.

द क्विंट की यह वीडियो रिपोर्ट अनुष्का की साड़ी बुनने वाले बुनकरों से हुई बातचीत दिखाती है. बनारस की पीली कोठी के ये बुनकर इस बातचीत में बताते हैं कि बनाते हुए तो उन्हें ही यह नहीं पता था कि यह साड़ी कौन पहनने वाला है, लेकिन अनुष्का के यह साड़ी पहनने और डिजाइनर सब्यसाची के ट्वीट के बाद साड़ी और इसे बनाने वाले दोनों ही चर्चा में आ गए हैं.

यहां बुनकर यह दावा करते भी नजर आते हैं कि ये साड़ियां इतनी सुंदर हैं कि कोई भी महिला पहन ले तो वह अनुष्का शर्मा लगने लगेगी. इस वीडियो में बुनकर इन साड़ियों को मिल रही चर्चाओं पर खुशी व्यक्त करते हुए कहते हैं कि उन्हें हमेशा इस तरह के प्रोत्साहन की जरूरत होती है और बड़ी हस्तियों से इस तरह का प्रचार मिलने से उनके को थोड़ी और कीमत और महत्व मिलने लगता है.

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किसी भाषा के बारे में यह जानना बेहद चौंकाने वाला तथ्य है कि उसे बोलने वाला सिर्फ एक ही इंसान दुनिया में बचा है. भाषाओं को बचाने की जरूरत क्यों है, यह बात द न्यूयॉर्क टाइम्स की इस वीडियो रिपोर्ट से समझी जा सकती है. यह रिपोर्ट लैटिन अमेरिकी देश पेरू में, अमेजन के जंगलों के आस-पास कभी प्रचलित रही भाषा ‘तौशीरो’ के बारे में बताती है. यह वीडियो तौशीरो बोलने-समझने वाले दुनिया के शायद इकलौते और आखिरी व्यक्ति एमादियो गार्सिया गार्सिया से मिलवाता है.

सदियों तक पेरू की जनजातियों द्वारा बोली जाती रही यह भाषा एमादियो के साथ ही खत्म होने जा रही है. एमादियो के माता-पिता और भाइयों के गुजर जाने के बाद अब उनके पास ऐसा कोई नहीं बचा जिससे वे इस भाषा में बात कर सकें. उनके पांच बच्चे हैं, लेकिन वे अब उनके साथ नहीं रहते और न ही तौशीरो भाषा को समझते हैं. इस तरह अब इस भाषा की पूरी विरासत सिर्फ एक इंसान पर टिकी है, जिसके जाने के साथ ही एक भाषाई संस्कृति भी खत्म हो जाएगी.