जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में अवंतीपोरा के लेठपोरा इलाके में स्थित सीआरपीएफ (केंद्रीय आरक्षित पुलिस बल) के शिविर पर रविवार को आतंकियों ने आत्मघाती हमला कर दिया. इस हमले पांच जवान शहीद हो गए. इनमें से चार की मौत आतंकियों की गोली से हुई. जबकि एक जवान की दिल का दौरा पड़ने से. हमले के बाद करीब 12 घंटे तक चली मुठभेड़ में रविवार देर शाम तक हमलावर तीनों आतंकी भी मार गिराए गए.

ख़बरों के मुताबिक़ आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. इस आतंकी संगठन को अभी चार दिन पहले ही घाटी में बड़ा झटका लगा था जब सुरक्षा बलों ने पुलवामा जिले में ही हुई एक मुठभेड़ में उसके शीर्ष कमांडर नूर मोहम्मद तांत्रे उर्फ़ नूल त्राली को मार गिराया था. इससे पहले जेईएम के सरगना मौलाना मसूद अज़हर के भतीजे तल्हा रशीद को भी नवंबर में मार दिया गया था. माना जा रहा है कि जेईएम ने सीआरपीएफ कैंप पर हमला कर इन्हीं मुठभेड़ों का बदला लिया है.

न्यूज़-18 के मुताबिक़ इस हमले की एक और खास बात यह रही कि इसमें कश्मीर के स्थानीय आतंकियों को ‘फ़िदायीन’ (आत्मघाती) की तरह इस्तेमाल किया गया. जबकि इससे पहले कम ही देखा गया है जब आतंकी संगठनों ने कश्मीरियों को फ़िदायीन हमलावरों की तरह इस्तेमाल किया हो. जेईएम और एलईटी (लश्कर-ए-तैयबा) जैसे संगठन फ़िदायीन हमलावरों के तौर पर अमूमन पाकिस्तानी आतंकियों का इस्तेमाल करते आए हैं. क्योंकि वे कश्मीर के स्थानीय आतंकियों पर इसके लिए ज़्यादा भरोसा नहीं कर पाते.

इसके अलावा फ़िदायीन हमले के लिए अग्रिम स्तर के प्रशिक्षण आदि की ज़रूरत भी होती है. हमले को अंजाम देने वालों को यह भी सिखाया जाता है कि उनके पास मौजूद हथियारों आदि का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कैसे करना है. सूत्रों की मानें तो अब तक इस तरह का प्रशिक्षण कश्मीर के आतंकियों को नहीं दिया जाता था. लेकिन सीआरपीएफ शिविर पर हुए हमले से यह चिंताजनक संकेत मिलता है कि अब संभवत: जेईएम और एलईटी जैसे संगठन कश्मीरियाें को भी फ़िदायीन हमलों के लिए प्रशिक्षित करने लगे हैं.