चीन और पूर्व एशिया के देशों में काम का अच्छा-खासा अनुभव रखने वाले राजनयिक विजय केशव गोखले भारत के अगले विदेश सचिव होंगे. गोखले भारतीय विदेश सेवा के 1981 बैच के अफसर हैं. वर्तमान में वे विदेश मंत्रालय में दूसरे देशों के साथ आर्थिक संबंधों से जुड़े मामले देखते हैं.

हिंदू के मुताबिक़ मौजूदा विदेश सचिव एस जयशंकर 28 जनवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. इसके बाद गोखले पद संभालेंगे. इस पद पर उनकी नियुक्ति संबंधी अधिसूचना सोमवार को जारी हुई हे. विदेश मंत्रालय में वापस आने से पहले गोखले चीन के राजदूत थे. जब भारत-चीन के बीच भूटान के अधिकार वाले क्षेत्र डोकलाम पठार पर दख़लंदाज़ी को लेकर विवाद चल रहा था उस समय गोखले भारत की तरफ़ से चीनी पक्ष से बातचीत कर रहे थे.

बताया जाता है कि गोखले की राजनयिक कुशलता की वजह से ही भारत डोकलाम के मसले पर चीन को पीछे हटने पर राजी कर सका. इसके बाद क़रीब 70 दिनों तक दोनों देशों के बीच चला सैन्य गतिराेध खत्म हुआ. गोखले की एक और खासियत है कि वे चीनी भाषा धाराप्रवाह बोल लेते हैं. उनके साथ काम कर चुके लोगों के मुताबिक़ वे परंपरावादी राजनयिक हैं. विजय केशव गोखले नियम-क़ायदों के पक्के और अपने दायरे के भीतर बख़ूबी काम करने वालों में गिने जाते हैं.

गोखले की विशेषज्ञता को देखते हुए यह अपेक्षा की जा रही है कि उनके कार्यकाल में चीन और पूर्व एशिया के देशों के साथ भारत के संबंधों में मज़बूती और स्थिरता आएगी. ठीक उसी तरह जैसे एस जयशंकर के विदेश सचिव बनने के बाद अमेरिका के साथ भारत के संबंध सुदृढ़ हुए थे. जनवरी- 2015 में जब एस जयशंकर को विदेश सचिव बनाया गया तब वे अमेरिका में भारत के राजदूत के तौर पर काम कर रहे थे.