हिंद महासागर में अपना प्रभुत्व बढ़ाने की कोशिशों के तहत चीन ने श्रीलंका में एक अरब डॉलर के निवेश का फैसला किया है. इस रकम से वहां 60 मंजिलों वाली तीन भव्य इमारतें बनाई जाएंगी. ये इमारतें श्रीलंका के मुख्य बंदरगाह के पास स्थित कोलंबो इंटरनेशनल फाइनेंशियल सिटी में बनेंगी. इस प्रोजेक्ट में चीन ने पहले ही 1.4 अरब डॉलर का निवेश कर रखा है. इस फाइनेंशियल सिटी में निवेश से चीन के कूटनीतिक और सामरिक हित भी सधते हैं क्योंकि इसके किनारे पर गहरे समुद्र में बना इलाके का अकेला बंदरगाह मौजूद है जहां चीन भारी-भरकम कंटेनरों को भी उतार सकता है.

मंगलवार को फाइनेंशियल सिटी के विकास कार्यों का जायजा लेने के बाद उत्साहित श्रीलंकाई प्रधानमंत्री रानिल विक्रमासिंघे ने कहा कि यूरोप और सिंगापुर की तरह निकट भविष्य में श्रीलंका का यह क्षेत्र हिंद महासागर में बड़े वित्तीय केंद्र के रूप में उभरेगा. एक अनुमान के अनुसार इसके विकास से श्रीलंका में जहां 83 हजार नौकरियों के अवसर पैदा होंगे तो वहीं इसके चलते वह करीब 13 अरब डॉलर का विदेशी निवेश हासिल करने में भी सफल होगा.

हिंद महासागर में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए चीन लगातार काम कर रहा है. श्रीलंका में वह हंबनटोटा बंदरगाह भी बना रहा है. दूसरी तरफ, चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर के जरिये वह अरब सागर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश में भी है. इस योजना के पूरा होने पर ब्लूचिस्तान का ग्वादर बंदरगाह, चीन के शिंजियाग प्रांत जुड़ जाएगा. माना जाता है कि अपने व्यापारिक और सामरिक हितों के लिए चीन स्ट्रिंग आॅफ पर्ल्स नाम की योजना पर काम कर रहा है और इसी के तहत वह ईरान की खाड़ी से अपनी समुद्री सीमा तक बंदरगाहों की श्रृंखला बना रहा है.