बहुचर्चित चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और अन्य दोषियों की सजा का ऐलान गुरुवार तक टल गया है. एनडीटीवी के मुताबिक एक अधिवक्ता के निधन पर रांची बार एसोसिएशन द्वारा शोक सभा रखे जाने की वजह से सजा का ऐलान टाला गया है, क्योंकि इस पर जिरह के लिए अदालत में अधिवक्ता मौजूद नहीं रहेंगे.

चारा घोटाले का यह मामला देवघर कोषागार से 1991 से 1994 के दौरान अवैध तरीके से 89.27 लाख रुपये निकाले जाने से जुड़ा है. इस मामले में 23 दिसंबर को रांची स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने लालू प्रसाद यादव और 14 अन्य लोगों को दोषी ठहराया था. अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा सहित सात लोगों को बरी कर दिया था.

चारा घोटाले के इस दूसरे मामले में लालू प्रसाद यादव को तीन साल से पांच साल तक की सजा हो सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक उनके वकीलों का कहना है कि तीन साल की सजा मिलने पर लालू प्रसाद यादव को तुरंत जमानत मिल सकती है. वे 23 दिसंबर से झारखंड के बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं.

इस बीच सीबीआई कोर्ट के 23 दिसंबर के फैसले के खिलाफ कथित टिप्पणी के मामले में अदालत ने राजद नेता रघुवंश प्रसाद सिंह और मनोज झा के साथ लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को अवमानना का दोषी पाया है. अदालत ने सभी लोगों को 23 जनवरी को हाजिर होने का आदेश दिया है. हालांकि, इसे चौंकाने वाला आदेश बताते हुए राजद प्रवक्ता मनोज झा ने कहा है कि उन्होंने अदालत के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोला है.