भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा को लेकर आज महाराष्ट्र की सड़कों और दिल्ली में संसद में हंगामा देखने को मिला. कांग्रेस के रजनी पाटिल और समाजवादी पार्टी के नरेश अग्रवाल ने भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा का मुद्दा राज्यसभा में उठाया. वहीं, कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकसभा में इस मुद्दे पर सवाल करते हुए कहा कि सरकार उन लोगों के बारे में बताए जिन्होंने भीमा कोरेगांव जा रहे दलितों पर पत्थरबाजी की. इस हंगामे के चलते संसद को दो बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा.

कोरेगांव हिंसा पर बोलते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कट्टर हिंदू कार्यकर्ताओं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर हिंसा कराने का आरोप लगाया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश द्वारा मामले की जांच कराए जाने की मांग की. इसके अलावा खड़गे ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोरेगांव हिंसा पर बयान देना चाहिए. खड़गे ने कहा कि ऐसे मुद्दों पर प्रधानमंत्री ‘मौनी बाबा’ बन जाते हैं.

उधर, भीमा कोरेगांव हिंसा के खिलाफ दलितों के महाराष्ट्र बंद का रेलवे और सड़क यातायात पर ख़ासा असर देखने को मिला. सोमवार को हुई हिंसा का मंगलवार से ही विरोध शुरू हो गया था. मुंबई, पुणे, औरंगाबाद समेत महाराष्ट्र के अन्य शहरों में भी विरोध प्रदर्शन हुए. बुधवार को दलित कार्यकर्ता मुंबई की सड़कों पर उतर आए. उन्होंने नारे लगाते हुए सड़कों को जाम कर दिया. रिपोर्टों के मुताबिक कई इलाकों में बसों में तोड़फोड़ भी की गई है. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने अंधेरी इलाके के नजदीक वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर जाम लगा दिया है. विरोध को देखते हुए रेलवे ने हाल ही चलाई गई वातानुकूलित लोकल ट्रेन की सेवाएं भी रद्द कर दी हैं.

इससे पहले मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भीम कोरेगांव हिंसा की न्यायिक जांच का आदेश दिया था. सोमवार को यहां एकत्रित दलित समुदाय के लोगों पर भगवा झंडे लिए कुछ लोगों ने कथित तौर पर हमला कर दिया था. इसके अलावा बसों में भी तोड़फोड़ की गई थी. भीमा कोरेगांव युद्ध 1 जनवरी 1818 को हुआ था. इसमें 500 सैनिकों वाली अंग्रेजी सेना ने बाजीराव द्वितीय के 28 हजार पेशवा सैनिकों को हरा दिया था. अंग्रेजी सेना में ज्यादातर सैनिक महार समुदाय के थे, जिन्हें तब अछूत माना जाता था. दलित समुदाय इसे महार सैनिकों की जीत के रूप में मनाता है और हर साल यहां समारोह आयोजित करता है.