तीन तलाक प्रथा को अपराध घोषित करने वाले विधेयक पर राज्यसभा में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है. बुधवार को सरकार ने इसे जांच के लिए सिलेक्ट कमेटी को सौंपने की विपक्ष की मांग खारिज कर दी. इसके बाद विपक्ष के हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी.

इससे पहले कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने विधेयक को राज्यसभा की सिलेक्ट कमेटी को सौंपने का प्रस्ताव रखा. इसके साथ समिति के लिए सदस्यों के नामों की सूची भी पेश की, जिसमें भाजपा का एक भी सांसद शामिल नहीं था. इस पर सदन के नेता अरुण जेटली ने कहा कि कांग्रेस 24 घंटे पहले सूचना दिए बगैर प्रस्ताव लाकर संसदीय प्रक्रिया का उल्लंघन कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम महिला (वैवाहिक अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017 को सिलेक्ट कमेटी को नहीं सौंपना चाहिए, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने इसे गलत बताया है और अपनी विशेष शक्तियों से इस पर छह महीने के लिए ही रोक लगाई है. केंद्रीय वित्त मंत्री के मुताबिक यह समय सीमा 22 फरवरी को पूरी हो रही है, इसलिए संसद को इस विधेयक को पारित कर देना चाहिए.

हालांकि, इस पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि अरुण जेटली सुप्रीम कोर्ट के अल्पमत के फैसले का जिक्र कर रहे हैं. 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तीन-दो के बहुमत से तीन तलाक प्रथा को असंवैधानिक घोषित कर दिया था. यह विधेयक लोकसभा से पिछले हफ्ते ही पारित हो चुका है.