दारुल उलूम देवबंद ने कहा है कि मुसलमानों को ऐसे परिवारों में रिश्ता करने से बचना चाहिए जिनका मुखिया बैंक में नौकरी करता हो. उसने कहा है कि बैंक की कमाई ब्याज से होती है जो इस्लाम में हराम है. दारुल उलूम के मुताबिक इसलिए इस तरह की नौकरी से कमाया गया पैसा भी हराम है.

दारुल उलूम ने यह फतवा एक सवाल के जवाब में दिया है. किसी शख्स ने उससे पूछा था कि उसके पास ऐसे परिवारों से भी विवाह के प्रस्ताव आ रहे हैं जिनका कमाऊ सदस्य बैंक में नौकरी करता है. इस शख्स का सवाल था कि क्या ऐसे परिवार से रिश्ता किया जा सकता है. इस पर फतवा देने वाली दारुल उलूम की इकाई दारुल इफ्ता का जवाब था कि मुमकिन हो तो नैतिकता के लिहाज से ऐसे रिश्तों से बचा जाना चाहिए.

इस्लामिक कानून यानी शरियत में पैसे पर ब्याज वसूलने की मनाही है. इस्लामिक बैंक भी इस सिद्धांत के हिसाब से काम करते हैं. ये बैंक ग्राहकों का पैसा उन कारोबारों में लगाते हैं जिनकी शरियत इजाजत देती है. भारत में भी कुछ समय पहले इस्लामिक बैंकिंग के लिए दरवाजे खोलने की बात हुई थी, लेकिन हाल ही में रिजर्व बैंक ने कहा है कि इसकी जरूरत नहीं है.