बिहार अब रणजी ट्रॉफी के साथ-साथ घरेलू क्रिकेट भी खेल सकेगा. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई से उसे रणजी ट्रॉफी और अन्य घरेलू क्रिकेट खेलने की अनुमति देने का निर्देश दिया. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि क्रिकेट के हित को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया जा रहा है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि विवादों को बाद में भी सुलझाया जा सकता है, लेकिन बिहार के क्रिकेटरों को क्रिकेट खेलने देना चाहिए.

अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि शीर्ष अदालत के आदेश से गठित बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) को राज्य में क्रिकेट का प्रभारी बनाया जाना चाहिए. बिहार ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में आखिरी बार 2003-04 में रणजी ट्रॉफी खेली थी. इसके बाद अलग क्रिकेट इकाई के गठन को लेकर विवाद की वजह से बीसीसीआई ने बिहार पर रणजी ट्रॉफी खेलने पर रोक लगा दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीए के सचिव आदित्य वर्मा की याचिका पर यह फैसला सुनाया है. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का आभार जताते हुए आदित्य वर्मा ने कहा, ‘आज यह बात करने का दिन नहीं है कि बिहार क्रिकेट को कौन चलाएगा. यह बिहार के बच्चों से जुड़ा फैसला है, जिन्हें अब क्रिकेट खेलने का अधिकार मिल गया है.’