राजस्थान विधानसभा सचिवालय में चपरासी के पद पर भाजपा विधायक के बेटे का चयन विवादों में घिर गया है. इस पद के लिए इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) और पोस्ट-ग्रेजुएशन जैसी योग्यताएं रखने वाले लोगों ने अप्लाई किया, लेकिन नौकरी मिली विधायक के दसवीं पास बेटे को. इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक बीते अक्टूबर में कम से कम 129 इंजीनियरों, 23 वकीलों, एक सीए और 393 पोस्ट-ग्रेजुएट उम्मीदवारों ने चतुर्थ श्रेणी के 18 पदों के लिए आवेदन दिया था. 15 दिसंबर को चुने गए 18 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की गई. इस लिस्ट में 12वें नंबर पर रामकृष्ण मीणा का नाम था जो भाजपा विधायक जगदीश नारायण मीणा के बेटे हैं.

रामकृष्ण के चयन को लेकर कांग्रेस पार्टी ने सत्ताधारी भाजपा पर निशाना साधा है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने मामले की उच्च-स्तरीय जांच करने मांग की है. उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की नीतियों की वजह से राजस्थान के युवा बेरोजगार हो रहे हैं और भाजपा नेता अपने रिश्तेदारों को सरकारी नौकरी दिलवाने में व्यस्त हैं.

उधर, जगदीश नारायण मीणा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है. मीणा ने दावा किया कि उनके बेटे के चुनाव की प्रक्रिया में कोई विसंगति नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मेरे बेटे ने नौकरी की सामान्य प्रक्रिया के तहत आवेदन किया था और एक इंटरव्यू के बाद उसका सिलेक्शन हो गया.’ विपक्ष के आरोपों पर भाजपा विधायक ने कहा, ‘विपक्ष कहता है कि बेटे को नौकरी दिलवाने के लिए मैंने अपने पद का इस्तेमाल किया. अगर मुझे ऐसा करना होता तो मैं अपने बेटे को चपरासी की नौकरी क्यों दिलवाता? फिर मैं उसे कोई ऊंचा पद दिलवाता.’