अक्सर कहा जाता है कि जीत का मजा तभी है जब चुनौती तगड़ी और परिस्थितियां आपके विपरीत हों. दो साल से अपने घर में कोई टेस्ट सीरीज न हारने वाली भारतीय टीम के लिए दक्षिण अफ्रीका दौरा कुछ इसी तरह का है. अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम की सबसे बड़ी चुनौती अपने दमदार प्रदर्शन को विदेशी धरती पर भी कायम रखने की है.

इस बार की भारतीय टीम पहले के मुकाबले ज्यादा बेहतर

भारतीय क्रिकेट टीम ने पहली बार 1991 में दक्षिण अफ्रीका का दौरा किया था. इसके बाद से टीम अफ्रीका में छह टेस्ट सीरीज खेल चुकी है. इस दौरान उसे 17 टेस्ट मैचों में से दो में जीत और आठ में हार का सामना करना पड़ा. साथ ही भारतीय टीम पिछले 25 सालों में अफ्रीका की धरती पर कोई भी टेस्ट सीरीज नहीं जीत सकी है.

बतौर कप्तान पहली बार दक्षिण अफ्रीका का दौरा कर रहे विराट कोहली के लिए इस रिकॉर्ड को पलटना ही सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है. हालांकि, भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली, सचिन तेंदुलकर और कृष्णमाचारी श्रीकांत की मानें तो यह टीम अफ्रीका में इस बार यह कर सकती है. इसकी वजह यह है कि इस टीम को पिछले 25 सालों की सबसे बेहतर और संतुलित टीम बताया रहा है.

इस टीम और पिछली भारतीय टीमों में सबसे बड़ा अंतर गेंदबाजी मोर्चे का है. इससे पहले अफ्रीका दौरे पर जो टीमें गईं उनमें सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण जैसे उस समय के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज थे. लेकिन, गेंदबाजी मोर्चे पर कमजोर होने की वजह से टीम बेहतर नहीं कर पाती थी. पिछले दौरे पर ही जोहानसबर्ग में खेले गए टेस्ट मैच में भारतीय टीम जीत की पूरी हकदार थी, लेकिन चौथी पारी में भारतीय गेंदबाज दक्षिण अफ्रीका के पुछल्ले बल्लेबाजों को आउट नहीं कर सके और टेस्ट मैच ड्रा पर समाप्त हुआ.

लेकिन, इस बार विराट कोहली के नेतृत्व में भारतीय टीम बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी आक्रमण में भी सर्वश्रेष्ठ दिख रही है. बल्लेबाजी की बात करें तो कप्तान विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा का दक्षिण अफ्रीका में प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है. 2013-14 में दो टेस्ट मैचों की सीरीज में इन तीनों ने ही 200 से ज्यादा रन बनाए थे. इस दौरान इनका औसत 68 से 70 के बीच रहा था. उस सीरीज में यह दक्षिण अफ्रीका के किसी भी मुख्य बल्लेबाज से बेहतर था.

हाल ही में एक साक्षात्कार में पूर्व भारतीय गेंदबाज इरापल्ली प्रसन्ना भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को पिछले 70 साल का सर्वश्रेष्ठ आक्रमण करार देते हैं. वे कहते हैं कि इस समय सात गेंदबाज दक्षिण अफ्रीका गए हैं जिनमें से चार नियमित तौर 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करते हैं. इससे पहले ऐसा कभी देखने को नहीं मिला. प्रसन्ना का मानना है कि इस गेंदबाजी आक्रमण में 20 विकेट लेने की क्षमता है.

इस बार दक्षिण अफ्रीका दौरे पर एक नकारात्मक पहलू यह है कि मात्र एक हफ्ते पहले वहां पहुंची भारतीय टीम ने कोई भी अभ्यास मैच नहीं खेला है. हालांकि, ऐसे में उसके लिए राहत की बात यह मानी जा रही है कि सीरीज की शुरुआत केपटाउन के न्यूलैंड्स क्रिकेट मैदान से हो रही है जिसे बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों के लिए ही मुफीद माना जाता है.

दक्षिण अफ्रीका का हाल

इस सीरीज में दक्षिण अफ्रीकी टीम काफी समय बाद मजबूत नजर आ रही है. इसका कारण 2015 के बाद से पहली बार इस टीम के सभी खिलाड़ियों का फिट होना है. वर्तमान में दुनिया के सबसे सबसे सफल तेज गेंदबाज डेल स्टेन, आलराउंडर क्रिस मारिस, विकेट कीपर बल्लेबाज क्विंटन डी कॉक और कप्तान फॉफ डू प्लेसिस सभी टीम के साथ हैं. 2015 के बाद से टेस्ट क्रिकेट से नदारद रहे एबी डिविलयर्स भी इस दौरे से टेस्ट क्रिकेट में वापसी कर रहे हैं.

काफी समय बाद अफ्रीकी टीम में यह भी देखने को मिल रहा है कि उसके सभी तेज गेंदबाज चयन के लिए उपलब्ध हैं. टीम मैनेजमेंट की सबसे बड़ी चिंता यह है कि वह डेल स्टेन, मोर्ने मॉर्केल, कागीसो रबादा, वर्नोन फिलेंडर और नवोदित एंडिल फेहलुकवायो जैसे तेज गेंदबाजों में से किसे अंतिम 11 में चुने.

भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण साल भर बाद वापसी करने वाले डेल स्टेन हो सकते हैं. न्यूलैंड्स की पिच डेल स्टेन को काफी रास आती है. वे इस पिच पर अब तक दुनिया के सबसे सफल गेंदबाज रहे हैं. यहां उन्होंने 13 टेस्ट मैचों में मात्र 22 के औसत से 65 विकेट लिए हैं. इस पिच पर ही उन्होंने भारत के खिलाफ हुए दो टेस्ट मैचों में 17 के औसत से 12 विकेट हासिल किए हैं.

देखा जाए तो इस टेस्ट सीरीज में दो बातें दक्षिण अफ्रीका को भारतीय टीम से कागजों पर मजबूत बनाती हैं. पहला उसके सभी खिलाड़ियों का फिट होना और दूसरा अनुकूल घरेलू हालात. लेकिन, कई क्रिकेट विश्लेषकों की मानें तो इस सीरीज में इन दोनों टीमों के बीच वह बड़ा अंतर नजर नहीं आता जो पिछले 25 सालों में देखने को मिला. यही कारण है कि विराट कोहली के नेतृत्व वाली भारतीय टीम इस बार अफ्रीका के सामने मजबूत चुनौती पेश कर सकती है. कई जानकार इसी वजह इस टेस्ट सीरीज में लंबे अरसे बाद एक उच्चस्तरीय टेस्ट क्रिकेट दिखने की भी आस लगाए हैं.