इस बार संसद का बजट सत्र 29 जनवरी से शुरू होने जा रहा है. इसी दिन सदन में इकॉनॉमिक सर्वे (आर्थिक सर्वेक्षण) भी पेश किया जाएगा. दो चरणों वाले आगामी सत्र का पहला चरण नौ फरवरी तक चलेगा जबकि दूसरे के लिए पांच मार्च से छह अप्रैल तक का समय निर्धारित किया गया है. सरकार ने इस संबंध में शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर दी है.

आर्थिक मामलों के जानकारों के मुताबिक वित्त वर्ष 2018-19 के आम बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली का फोकस टैक्स की तुलना में विकास योजनाओं पर ज्यादा रहेगा. इसकी दो वजहें हैं. पहली यह कि 2019 में आम चुनाव होने हैं. ऐसे में बजट प्रस्तावों में देश का मतदाता उनके दिमाग में जरूर रहेगा. और दूसरी यह कि गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लागू होने के बाद टैक्स नीतियों में फिलहाल ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है. यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि वित्त मंत्री बचत प्रस्तावों के जरिये इनकम टैक्स में करदाताओं को राहत दे सकते हैं.

पूर्व के वर्षों में भारत सरकार का आम बजट 28 फरवरी को पेश किया जाता था. लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने इसकी तारीख एक फरवरी तय कर दी है और इसबार भी बजट इसी तारीख को पेश होना है. इसके पीछे सरकार का यह तर्क है कि बजट प्रस्तावों पर जल्दी चर्चा कराके उन्हें पास कराया जाए और एक अप्रैल तक संबंधित योजनाओं के लिए तय राशि आवंटित हो जाए ताकि योजनाओं कोे समय से पूरा करने में पैसा रोड़ा न बनें.