उत्तर प्रदेश में अब हज हाउस की दीवारें भी ‘भगवा’ (केसरिया) हो चुकी हैं. डेक्कन क्रॉनिकल में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक लखनऊ में स्थित उत्तर प्रदेश राज्य हज समिति के दफ़्तर की दीवारों पर केसरिया रंग चढ़ा दिया गया है. अमूमन यहां पहले हरा (मुस्लिम समुदाय में इस रंग को पवित्र माना जाता है) और सफ़ेद रंग ही नजर आता था. इस बाबत योगी सरकार में इक़लौते मुस्लिम मंत्री मोहसिन रज़ा कहते हैं, ‘केसरिया रंग से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. इसका इस्तेमाल करने में क्या दिक्कत है.’

उधर, विपक्ष का आरोप है कि इसके जरिए सरकार ‘अपने भगवा एजेंडे को लागू करने’ और ‘मुस्लिमों को उक़साने’ की कोशिश कर रही है. कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत कहते है, ‘हज हाउस की दीवारों पर केसरिया रंग चढ़ाना मुस्लिमों को जानबूझकर उक़साने की कोशिश है. अगर हिंदुओं को केसरिया रंग इस्तेमाल करने की इजाज़त है तो मुस्लिमों को भी हरे रंग के उपयोग की अनुमति होनी चाहिए.’ इसी तरह सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं, ‘ऐसे कदमों से भाजपा राज्य में ख़तरनाक स्थिति पैदा कर रही है.’

राज्य में भारतीय जनता पार्टी की योगी सरकार को अभी 10 महीने ही हुए हैं. लेकिन इस बीच वह अपने भगवा एजेंडे को अमल में लाते हुए लगातार सुर्ख़ियों में रही है. सरकार इससे पहले किताबों, सरकारी डायरियों, फ़र्नीचर, स्कूली इमारतों, राज्य परिवहन की बसों, बिजली के खंभों आदि पर भी केसरिया रंग चढ़वा चुकी है.

हालांकि पार्टियों द्वारा इमारतों से लेकर डिवाइडरों तक तमाम चीजों को अपने पसंदीदा रंग में रंगने का चलन नया नहीं है. पूर्व में समाजवादी और बहुजन समाजवादी पार्टी भी ऐसा कर चुकी हैं. भाजपा सरकार इसी चलने को आगे बढ़ाती दिख रही. बीते साल रोडवेज की बसों के अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय और शीर्ष नौकरशाहों के बंगले भी इसी रंग में रंगे गए थे. राज्य में सरकारी कार्यक्रमों के पंडाल भी अब केसरिया रंग के ही दिखते हैं.