ता​लिबान और हक्कानी गिरोह को खत्म करने के लिए अगर पाकिस्तान निर्णायक कार्रवाई नहीं करता तो अमेरिका अपने पास मौजूद ‘हर विकल्प’ पर विचार करेगा. शनिवार को इस कड़ी प्रतिक्रिया के साथ पाकिस्तान को मरहम लगाते हुए व्हाइट हाउस ने यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ जंग में वह अपने इस सहयोगी का साथ देना चाहता है. यानी अगर इस मोर्चे पर पाकिस्तान को कोई बड़ी कामयाबी मिलती है तो दोनों देशों के रिश्ते फिर पटरी पर लौट सकते हैं.

अमेरिका ने यह प्रतिक्रिया ऐसे वक्त पर दी है जब वह पाकिस्तान को आतंकियों का पनाहगार बताकर उसे दी जाने वाली दो अरब डॉलर की सैन्य सहायता रोक चुका है. इसी साल के दूसरे ही दिन उसने पाकिस्तान की 25.5 करोड़ डॉलर की आर्थिक सहायता भी रोक दी थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने खबर दी है कि सैन्य सहायता रोके जाने के बाद हुई ताजा बैठक में अमेरिकी नीति नियंताओं ने पाकिस्तान से उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) का सहयोगी देश का दर्जा वापिस लेने का सुझाव दिया है. साथ ही, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) जैसे संस्थानों के जरिये उस पर बहुपक्षीय दबाव बनाने की सलाह भी दी है.

ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के मुताबिक तालिबान और हक्कानी समूह की कमर तोड़ने के लिए अमेरिका के पास साधनों की कोई कमी नहीं है. लेकिन वह अब भी पाकिस्तान को यह विश्वास दिलाना चाहता है कि उसके पास ऐसा कर दिखाने की काबिलियत और सामर्थ्य दोनों हैं.

दूसरी तरफ पत्रकारों से बातचीत में अमेरिका के सुरक्षा सचिव जिम मैटिस ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सुरक्षा सहायता की रोक को अस्थायी बताया है. उन्होंने कहा है कि इसे दोबारा शुरू किया जा सकता है बशर्ते आतंकवादियों के खिलाफ पाकिस्तान असरदार नतीजे पेश करे. मैटिस ने पिछले साल दिसंबर में पाकिस्तान का दौरा किया था और देश के शीर्ष नेताओं के सामने आतंकवाद के मुद्दे पर अमेरिका का रुख पूरी स्पष्टता के साथ रखा था.