फैशन मैग्जीन वोग के कवर पर छपी करीना कपूर की तस्वीर ने सोशल मीडिया पर बवाल मचा दिया है. इस तस्वीर में वे स्टाइलिश बिकनी में अपना ‘सुगठित’ और ‘बेदाग’ गुलाबी शरीर दिखाती नजर आ रही हैं. आमतौर पर किसी फिल्म या फैशन पत्रिका के कवर पर छपी तस्वीरें ऐसी ही होती हैं और करीना के प्रशंसक भी उन्हें इसी अवतार में देखते रहना चाहते हैं. लेकिन इस बार वोग में छपी उनकी तस्वीरों पर एक अलग ही विवाद खड़ा हो गया है. सोशल मीडिया पर एक तबका ऐसा है जिसे इस बात पर आपत्ति है कि मां बनने के बावजूद करीना के शरीर पर स्ट्रेच मार्क्स नजर क्यों नहीं आ रहें हैं! या वे डिलीवरी के एक साल बाद ही इतनी पतली कैसे नजर आ रही हैं. करीना कपूर की इन तस्वीरों को लेकर कहा जा रहा है कि ये फेक हैं. इनमें करीना के शरीर से स्ट्रेच मार्क्स हटाने और उन्हें पतला दिखाने के लिए फोटोशॉप का सहारा लिया गया है. ये भी कि ये उनके चाहने वालों और उन महिलाओं के लिए एक गलत उदाहरण पेश करती हैं, जो फिटनेस के मामले में उन्हें अपना आदर्श मानते हैं. उन महिलाओं के लिए भी जो अभी हाल ही में मां बनी हैं. बीते कुछ दिनों से ये चर्चाएं सोशल मीडिया के साथ-साथ मीडिया की सुर्खियों का हिस्सा भी बन रही हैं.

क्यों यह बहस ही बेकार है

इस मामले पर करीना कपूर से पहले आम आदमी की ही बात कर लेते हैं. क्या वह सेल्फी लेने के लिए कैमरा उठाता है और पहली ही तस्वीर सोशल मीडिया पर अपलोड कर देता है? नहीं! ग्लैमर वर्ल्ड से दूर-दूर तक कोई नाता न रखने वाले लोग भी (महिलाएं ही नहीं पुरुष भी) खींचते वक्त अलग-अलग एंगल से दसों तस्वीर खींचते हैं और उसके बाद फोटो एडिटिंग एप या फिल्टर आदि इस्तेमाल कर उसे अधिक से अधिक सुंदर बनाने की कोशिश करते हैं. हर व्यक्ति उस एक तस्वीर के पीछे थोड़ी-बहुत मेहनत और समय खर्च करता ही है जिसे वह कई लोगों को दिखाना चाहता है. अगर ऐसा नहीं होता तो बाजार में सेल्फी-कैमरा फोन इतने लोकप्रिय न होते. वे आपको, आपके हिसाब से, आपकी तस्वीर खींचने की सुविधा देते हैं.

इसके बावजूद अगर किसी को लगता है कि वे करीना कपूर या किसी भी एक्टर-मॉडल की जो छवि उनकी तस्वीरों में देखते हैं, वह वास्तविक होती है तो वे गलतफहमी में हैं. कोई भी अभिनेत्री जब इस तरह के फोटो शूट के लिए तैयार होती है तो वह एक तरह से उसका कायाकल्प होने जैसा ही होता है. मेकअप, ड्रेस, हेयर से लेकर लोकेशन, लाइटिंग, कैमरा लेंसेज और फोटो एडिटिंग तक न जाने कितनी ऐसी चीजें गिनी जा सकती हैं जो उनका लुक डिसाइड करती हैं. ऐसे में स्वाभाविक है कि अभिनेत्रियां अपने वास्तविक रूप की तुलना में कई गुना आकर्षक दिखाई देती हैं. यानी कि उनकी सुंदरता का एक बड़ा हिस्सा आभासी है या बनाया गया (मेडअप) है.

इसलिए जो अनरियल ब्यूटी स्टैंडर्ड्स की शिकायत कर रहे हैं, उन्हें फिल्म एक्ट्रेस की सुंदरता को न तो अपना आदर्श बनाना चाहिए और न ही उनसे ऐसा बनने की उम्मीद ही करनी चाहिए. क्योंकि टीवी, फैशन या सिनेमा से जुड़े किसी भी मॉडल या एक्टर के लिए उसका सुंदर शरीर ही उसकी सबसे बड़ी संपत्ति है. इसकी वजह से उन्हें लाखों-करोंड़ों रुपए मिलते हैं. और इसकी सबसे बड़ी वजह हम हैं. संभव है, वोग के कवर पर आने के लिए भी करीना कपूर को एक बड़ी रकम दी गई हो. इसलिए अभिनेत्री या पत्रिका इस तस्वीर में आदर्श दिखने/दिखाने के लिए हर जतन करेंगे ही. फिर चाहे मेकअप की मदद से नाक तीखी करना हो या फोटोशॉप से अपनी कॉलर बोन्स को उभारकर दिखाना. करोड़ों के इस खेल में अगर कोई यह उम्मीद करता है कि उसे करीना कपूर खान की नैचुरल ब्यूटी देखने को मिलेगी, तो इसे उसकी कमअक्ली न कहें तो क्या कहें!

क्या करीना को अभी तक मोटी और खिंची त्वचा वाली ही होना चाहिए था

जहां तक स्ट्रेच मार्क्स का सवाल है, यह जरूरी नहीं है कि प्रेग्नेंसी के बाद हर महिला को स्ट्रेच मार्क्स हों ही. अच्छा खान-पान और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने वाली महिलाओं को ये नहीं भी होते हैं या बहुत कम होते हैं. कुछ महिलाओं के साथ ऐसा भी होता है कि शुरू में उन्हें कुछ निशान होते हैं लेकिन वक्त के साथ वे धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं. इस हिसाब से भी अगर देखें तो करीना कपूर प्रेग्नेंसी के पहले और बाद में खासी एक्टिव रहीं हैं और उनकी डिलीवरी को भी पूरा एक साल बीत चुका है.

लगातार सालों की एक्सरसाइज और प्रोटीनरिच डाइट जिसमें पानी की भी सही भूमिका हो, किसी के भी शरीर को लचीला और उसकी त्वचा को स्वस्थ बना सकते हैं. ऐसे व्यक्ति का आसानी से मोटा-पतला होना संभव है और ऐसे कि उसके शरीर पर इसका कोई साइड इफेक्ट नजर न आए. अगर करीना कपूर की बात करें तो साइज जीरो को ट्रेंड में लाने वाली यह अभिनेत्री फिल्म इंडस्ट्री की फिटनेस फ्रीक्स में गिनी जाती है. प्रेग्नेंट होने के पहले, इसके दौरान और बाद में वे अक्सर जिम में पसीना बहाती नजर आती रहीं हैं. हैशटैग ‘फिटनेस गोल्स’ के साथ पोस्ट होने वाली उनकी इंस्टाग्राम तस्वीरों को उनकी आलोचना करने वाले ही हजारों की संख्या में लाइक करते रहे हैं.

बॉलीवुड की टॉप हीरोइन्स में से एक करीना कपूर के पास अच्छे से अच्छे जिम ट्रेनर, योग्य डाइटीशियन और उनके शरीर के इंच-इंच का हिसाब रखने वाली एक टीम भी है. करीना के शरीर पर जितनी मेहनत वे खुद करती हैं, उससे कहीं ज्यादा मशक्कत यह टीम करती होगी. कम्पलीट न्यूट्रीशंस वाली डाइट और सालों की मेहनत से गठे शरीर पर प्रेग्नेंसी का कोई चिन्ह नजर न आना और उसका मात्र बारह महीनों में ही पुराना आकार ले लेना, कोई बड़ी बात नहीं है. इसके उलट बड़ी बात तो यह हो जाती है कि करीना के शरीर पर स्ट्रेच मार्क्स ढूंढने वाले लोग किस मानसिक अवस्था का परिचय दे रहे हैं जब वे इंस्टाग्राम पर उन्हें धिक्कारते हुए कह रहे हैं कि उन पर विश्वास नहीं किया जा सकता क्योंकि अपने शरीर के निशान छिपाने के लिए उन्होंने फोटोशॉप का सहारा लिया है.

पर क्या वे नयी नवेली मांओं के लिए गलत आदर्श पेश कर रही हैं

करीना कपूर को प्रेग्नेंसी को स्टाइलिश बनाने का श्रेय दिया जाता है. कल तक वे इस बात के लिए लोगों की आदर्श थीं कि मोटा होने पर उन्होंने कैमरे से छुपने की कोशिश नहीं की. वे बेबी बंप के साथ तमाम आयोजनों और विज्ञापनों में नजर आती रहीं. कल तक जो करीना अपनी बोल्डनेस के लिए लोगों की वाहवाही लूट रही थीं, आज अचानक बुरी हो गई हैं, कहा जा रहा है कि वे उन लाखों महिलाओं के सामने गलत उदाहरण पेश कर रही हैं जो हाल ही मां बनी हैं. अगर बच्चा होने के एक साल बाद ये महिलाएं करीना की तस्वीरों जैसा फिगर नहीं पा सकेंगी तो कुंठित हो जाएंगी. यह बात लगती तो सही है, लेकिन उतनी भी नहीं है.

किसी आम महिला के लिए भी ऐसा क्यों माना जाना चाहिए कि बच्चा होते ही उसकी शारीरिक सुंदरता पर फुल स्टॉप लग गया. अब उसे खूबसूरत नजर आने की जरूरत नहीं या वह जैसी चाहे वैसी – सीधे शब्दों में बेडौल – दिख सकती है. बीते दो सालों में करीना कपूर नई-नवेली मांओं की आदर्श रही हैं और अगर लेना चाहें तो इन तस्वीरों के जरिए भी तो लेने वाले उनसे फिटनेस की प्रेरणा ले ही सकते हैं.

कुल मिलाकर करीना कपूर खान का शरीर उनकी खुद की मेहनत के साथ-साथ अगर मेकअप, कैमरा ट्रिक, फोटोशॉप, कपड़ों के चतुराई भरे इस्तेमाल या इन सब मिली-जुली वजहों से आदर्श नजर आ रहा हो, तो भी इसमें इतना हल्ला मनाने जैसा क्या है! इसके बजाय अगर थुलथुल शरीर और स्ट्रेच मार्क्स वाली करीना होतीं तो यहां पर एक अलग तरह की बहस हो रही होती. सोशल मीडिया का काम ट्रोल करना ही है और करीना इसकी अकेली शिकार नहीं हैं. करीब डेढ़ साल पहले प्रियंका चोपड़ा भी ऐसी ही एक मैगजीन पर चिकनी बगलें (आर्मपिट्स) दिखाने के लिए ट्रोल की गईं थी. इस तरह की बहसें करने वालों के बारे में क्या ऐसा कहना गलत होगा कि इनमें से कुछ अज्ञानी होते हैं, कुछ बेरोजगार, कुछ हिपोक्रेट और ज्यादातर गलत!