फ्रेंच ऑटोमोबाइल कंपनी रेनो ने अपने ग्राहकों को नए साल की सौगात देते हुए हैचबैक क्विड का नया अवतार बाजार में पेश किया है. हालांकि इस नई कार में कोई मैकेनिकल बदलाव देखने को नहीं मिला है लेकिन कई कॉस्मेटिक बदलाव जरूर हैं. इनमें कार की रूफ, हुड और दरवाजों पर लगे ड्यूल टोन स्पीडस्टर ग्राफिक्स मुख्य हैं जो कार के पांच बॉडी कलर- फियरी रेड, आउटबैक ब्रोंज, आइसकूल व्हाइट, मूनलाइट सिल्वर और प्लानेट ग्रे के साथ खासे फबते हैं.

क्विड-2018 की फ्रंट ग्रिल स्टील की है और इसके व्हील कवर्स भी पहले से ज्यादा आकर्षक हैं. इनके अलावा कार में रिवर्स पार्किंग सेंसर, 7-इंच टचस्क्रीन मीडियानेव सिस्टम, डिजिटल इंस्ट्रुमेंटेशन, वन-टच लेन चेंज इंडिकेटर्स और रेडियो स्पीड-डिपेंडेंट वॉल्यूम कंट्रोल सिस्टम जैसे फीचर्स शामिल किए गए हैं.

बाजार में मौजूद क्विड 3-सिलेंडर वाले दो पेट्रोल इंजन विकल्पों के साथ उपलब्ध है. इसका 799 सीसी इंजन 54 बीएचपी की अधिकतम पॉवर के साथ 72 एनएम का टॉर्क उत्पन्न करता है. जबकि इसका 999 सीसी क्षमता का इंजन 67 बीएचपी की ताकत और 91 एनएम का टॉर्क पैदा करने में सक्षम है. ये दोनों इंजन 5-स्पीड मैनुअल गियर बॉक्स और बड़ा इंजन ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन बॉक्स के साथ जोड़ा गया है. नई क्विड रेनो के सभी शोरूमों पर बिक्री के लिए उपलब्ध है. इसके तीन मॉडलों की कीमत क्रमश: 2.66 लाख, 3.58 लाख और 3.88 लाख रुपए (एक्स शोरूम) तय की गई है.

नई स्विफ्ट की बुकिंग शुरू

मारुति की लोकप्रिय हैचबैक स्विफ्ट के बाजार में जल्द ही आने की खबरों के बाद डीलरशिप लेवल पर इस कार की बुकिंग शुरू कर दी गई है. फिलहाल इस कार को 11 हजार रु देकर बुक किया जा रहा है. हालांकि जानकारों के मुताबिक मारुति ने आधिकारिक तौर पर नई स्विफ्ट की बुकिंग शुरु करने के निर्देश नहीं दिए हैं. लेकिन इस कार से जुड़ी जानकारी पाने के लिए डीलरशिप पर पहुंच रहे ग्राहकों की बड़ी संख्या को देखते हुए इसकी बुकिंग शुरू की गई है.

स्विफ्ट की लोकप्रियता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि बुकिंग शुरू होने के कुछ ही दिन बाद इस कार के लिए तीन से चार महिने का वेटिंग पीरियड दिया जा रहा है. मारुति से जुड़े लोगों के अनुसार कंपनी ने अपने डीलर्स को नई स्विफ्ट के बाजार में आने से पहले ही इस कार का पुराना स्टॉक क्लियर करने के निर्देश दिए हैं.

जानकारों के मुताबिक स्विफ्ट-2018 पहले से वजन में हल्की लेकिन मजबूत और दमदार कार है. बताया जा रहा है कि इस कार को कंपनी ने हार्टेक नाम के एक प्लेटफॉर्म पर तैयार किया है. इस पर बलेनो, डिजायर और इग्निस जैसी गाड़ियां भी तैयार की जा चुकी हैं. हल्की होने की वजह से यह नई कार बढ़िया माइलेज और पिकअप देने में सक्षम होगी.

यदि इसकी परफॉर्मेंस की बात करें तो बताया जा रहा है कि इसके पेट्रोल मॉडल में 4-सिलेंडर वाला 1200 सीसी क्षमता का नेचुरली अस्पिरेटेड इंजन लगा होगा जो 82 बीएचपी की अधिकतम पॉवर के साथ 112 एनएम का टॉर्क उत्पन्न करने में सफल होगा. इस इंजन के साथ 5- स्पीड मैनुअल और एएमटी दोनों ट्रांसमिशन विकल्प दिए जाएंगे. वहीं कार के डीज़ल वर्जन में 1248 सीसी का टर्बोचार्ज्ड इंजन देखने को मिल सकता है जो 74 बीएचपी के साथ 190 एनएम का अधिकतम टॉर्क पैदा करने में सक्षम होगा. कार के डीज़ल वर्जन में भी पेट्रोल ही की तरह 5-स्पीड मैनुअल और ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन विकल्प देखने को मिल सकता है. अंदाजा लगाया जा रहा है कि कंपनी इस कार के शुरुआती पेट्रोल वर्जन के लिए 3.99 लाख रुपए से लेकर टॉप एंड डीज़ल मॉडल के लिए 7.99 लाख रुपए तय कर सकती है.

दिल्ली में वन फैमिली, वन कार नीति से जुड़ी याचिका खारिज़

नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में ‘वन फैमिली, वन कार’ की नीति की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार एनजीटी के कार्यवाहक अध्यक्ष यूडी साल्वी की बेंच ने इससे जुड़ी याचिका को अपरिपक्व बताया. हालांकि, एनजीटी ने याचिकाकर्ता को संबंधित प्राधिकरण से संपर्क साधने की इजाजत दे दी है.

रिपोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्ता एडवोकेट सजन कुमार सिंह ने ‘वन फैमिली, वन कार’ नीति के आधार पर निजी वाहनों के पंजीकरण की नीति बनाने की मांग की थी. इसके तहत एक परिवार एक ही गाड़ी पंजीकृत करा सकेगा. याचिकाकर्ता के मुताबिक निजी और व्यवसायिक वाहनों के कॉर्बन उत्सर्जन से होने वाली पर्यावरणीय क्षति इंसानी जीवन के लिए खतरा पैदा कर रही है.

याचिका में दिल्ली-एनसीआर में गाड़ियों की बेतहाशा बढ़ती संख्या पर चिंता जताई गई थी. इसमें कहा गया था, ‘दिल्ली में 1981 में 5.13 लाख गाड़ियां थीं जो 2001 में बढ़कर 32.38 लाख हो गईं.’ इसके अलावा दिल्ली में प्रति व्यक्ति यात्रा दर भी बढ़ी है. यह 1981 में 0.72 थी जो 2001 में 0.87 हो गई. याचिकाकर्ता के मुताबिक बढ़ते प्रदूषण स्तर की वजह से दिल्ली गैस चेंबर में तब्दील हो चुकी है.