फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी जैसे देशों में पिछले साल हुए आतंकी हमलों ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की चिंता बढ़ा दी है. क्योंकि वे सब लोन वोल्फ़ हमले थे. यानी ऐसे हमले जिसमें योजना बनाने से लेकर उसे अंज़ाम देने तक पूरा काम एक ही आतंकी करता है. ऐसे मामलों में पहचान और कार्रवाई दोनों सुरक्षा व ख़ुफ़िया एजेंसियों के लिए मुश्किल होती है.

लोन वोल्फ़ के अलावा आतंकी इन दिनों डीआईवाई (डू-इट-योरसेल्फ़) शैली का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. इसमें हमलावर अपना दिमाग़ लगाकर जैसे चाहे वैसे हमले को अंज़ाम देता है. वह चाहे तो भीड़ के बीच ट्रक दौड़ा दे. चाहे तो लोगों को चाकू या किसी धारदार हथियार से घायल कर दे, मार डाले. या ऐसे कोई भी काम. बस लक्ष्य एक होता है- दहशत फ़ैलाना और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की जान लेना.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़ केंद्रीय गृह मंत्रालय ऐसे मामलों से निपटने के लिए अलग से सेल में बनाने की तैयारी में है. अख़बार के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मध्य प्रदेश के टेकनपुर में देश के शीर्ष पुलिस अधिकारियों की तीन दिनी कॉन्फ्रेंस के दौरान इस मसले का ज़िक्र किया है. आतंक के नए प्रारूपों से निपटने की रणनीति बनाने की ज़रूरत पर भी जोर दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सोमवार को इस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे हैं.

बताते हैं कि ख़ुफ़िया ब्यूरो (आईबी) ने रविवार को कॉन्फ्रेंस के दौरान ही स्पेशल सेल के गठन की ज़रूरत बताई है. यह सेल आतंकियों/उग्रवादियों/नक्सलियों से जुड़ी तमाम जानकारियां जुटाकर उन्हें रियल टाइम बेसिस पर केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और राज्यों की पुलिस को मुहैया कराएगा. राज्यों के पुलिस प्रमुखों से भी कहा गया है कि अपने प्रदेशों में आतंकियाें के काम करने के तौर-तरीकों का अध्ययन करें. उन पर नजर रखें. ताकि प्रभावी कार्रवाई हो सके.

कॉन्फ्रेंस में मौजूद सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री खुद देश का सुरक्षा ढांचा और मज़बूत करने की इच्छा जता चुके हैं. इस सिलिसले में उन्होंने देश के शीर्ष पुलिस अफ़सरों की रविवार को बैठक भी ली है. इसमें उन्होंने ख़ासतौर पर पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा की है.