राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हत्याकांड की दोबारा जांच कराने की मांग करने वाली याचिका पर न्यायमित्र अमरेंद्र शरण ने सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंप दी है. द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार इस रिपोर्ट में उन्होंने कहा है कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद उनके शरीर में लगी गोलियों, इसमें इस्तेमाल पिस्तौल, हत्यारों, इसकी साजिश और इसके पीछे सक्रिय विचारधारा की अच्छी तरह से जांच की गई थी. उन्होंने आगे कहा कि ट्रायल कोर्ट के चार हजार पन्नों के दस्तावेजों और इस मामले में गठित जीवन लाल कपूर जांच आयोग की रिपोर्ट देखने के बाद ऐसी कोई बात सामने नहीं आई, जिससे इस हत्याकांड की जांच पर कोई संदेह पैदा हो. न्यायमित्र ने यह भी कहा कि इस मामले की दोबारा जांच कराने या तथ्यों को जुटाने के लिए दोबारा आयोग बनाने की कोई जरूरत नहीं है.

पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने अभिनव भारत के सह-संस्थापक डॉ पंकज फडनीस की याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र शरण को इस मामले में न्याय मित्र नियुक्त किया था. अदालत ने उनसे यह बताने को कहा था कि क्या इस मामले में दोबारा जांच करने का आदेश देने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं? डॉ पंकज फडनीस ने अपनी याचिका में महात्मा गांधी की हत्या के पीछे एक और शख्स के शामिल होने का शक जताया था और इसकी दोबारा जांच कराने की मांग की थी.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने नई दिल्ली में तीन गोलियां मारी थीं, जिससे उनकी मौत हो गई थी. इस मामले में नाथू राम गोडसे और नारायण आप्टे को फांसी की सजा दी गई थी.