यूआईडीएआई (यूनीक़ आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने करीब 5,000 अधिकारियों को आधार पोर्टल पर जाकर आम लोगों की जानकारियां देख लेने के अधिकार से वंचित कर दिया है. द इकॉनॉमिक टाइम्स के मुताबिक़ यह कदम चार जनवरी के बाद उठाया गया है. यानी उस दिन के बाद जब द ट्रिब्यून अख़बार ने यह ख़ुलासा किया था कि लोगों के ‘आधार’ से जुड़ी तमाम जानकारियां महज़ 500 रुपए देकर 10 मिनट में हासिल की जा सकती हैं.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘सक्षम अधिकारियों को पोर्टल पर जाने के संबंध में दिए गए सभी विशेषाधिकार तुरंत प्रभाव से वापस ले लिए गए हैं. नई व्यवस्था के तहत किसी के आधार से जुड़ी कोई भी जानकारी अब उसी सूरत में हासिल की जा सकेगी या बदली जाएगी जब संबंधित व्यक्ति की बायोमैट्रिक पहचान (अंगुलियो-आंख की पुतलियों के निशान आदि) की पुष्टि हो जाएगी.’

यूआईडीएआई को रोज क़रीब पांच लाख आवेदन मिलते हैं. इनमें संबंधित लोगों द्वारा उनके आधार की जानकारियों में कुछ न कुछ बदलाव की मांग होती है. इतनी बड़ी तादाद में आवेदनों को निपटाने के लिए केंद्र व राज्यों के चुनिंदा अधिकारियों को विशेषाधिकार दिए गए थे. ताकि वे आधार पोर्टल पर जाकर किसी का 12 अंक का आधार नंबर डालकर उसका नाम, पता, जन्म तिथि आदि बदल सकें. लेकिन अब ये अधिकार उनसे छीन लिए गए हैं.

सूत्र मानते हैं कि आधार से जुड़ी जानकारियां लगातार सार्वजनिक होने की घटनाओं के पीछे इस बड़ी तादाद में अधिकारियों को मिले विशेषाधिकारों की भी भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता. इसीलिए नई व्यवस्था लागू की गई है. इससे लोगों को कुछ परेशानी तो होगी. क्योंकि अब आधार से जुड़ी उनकी जानकारियों में जल्द तब्दीली नहीं हो सकेगी. लेकिन इससे आधार से जुड़ी जानकारियां सार्वजनिक होने की घटनाओं पर भी रोक लगेगी.