केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और उनकी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को माओवादियों ने अपना दुश्मन नंबर-एक बताया है. साथ में यह कहा है कि केरल में ‘अघोषित आपातकाल’ लागू है. हालांकि दिलचस्प बात यह भी है कि केरल के सत्ताधारी वामगठबंधन पिनराई सरकार में शामिल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) पर माओवादियों ने कोई आरोप नहीं लगाया है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े संगठन डब्ल्यूजीएसज़ेडसी (वेस्टर्न घाट स्पेशल ज़ोन कमेटी) ने आरोप लगाया है कि पिनराई सरकार ने माओवादियों के ख़िलाफ़ हमले बढ़ाए हैं. संगठन के मुखपत्र ‘कम्युनिस्ट’ में पिनराई विजयन की तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की गई है. साथ ही कहा गया है, ‘इतिहास अपने आप को दोहरा रहा है. इससे पहले भी माकपा ने आंदोलनकारी ताकतों (माओवादियों) के ख़िलाफ़ इंदिरा गांधी सरकार की सैन्य आक्रामकता का समर्थन किया था. और आज वह वैसे ही केंद्र की भाजपा सरकार का साथ दे रही है.’

माओवादियों ने नीलांबुर में नक्सलियों के साथ सुरक्षाबलों की मुठभेड़ को फ़र्ज़ी बताया. साथ ही इसे सरकारी आतंकवाद की मिसाल के तौर पर भी पेश किया. यह भी लिखा गया, ‘केरल में जब वामगंठधन की सरकार बनी तब हमने कहा था कि यह केंद्र की फासिस्ट मोदी सरकार की जूनियर पार्टर बन जाएगी. आज यह बात पूरी तरह सही साबित हो रही है. केरल में पूरी सरकारी मशीनरी ग्रामीण इलाकों में माओवादियों के ख़िलाफ़ ज़हर फैलाने में लगी है. केंद्र की याेजना के अनुसार केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक की सरकारें पश्चिमी घाट में माओवादियों का चुन-चुनकर शिकार कर रही हैं.’