अमेरिका में काम कर रहे विदेशी नागरिकों खासकर भारतीयों के लिए यह खबर राहत बनकर आई है. ट्रंप प्रशासन के मुताबिक वह ऐसे किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रहा है जिसके चलते एच-1बी वीजा धारकों को छह साल की अधिकतम अवधि गुजर जाने के बाद जबर्दस्ती उनके देश भेज दिया जाए. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी जोनाथन विथिंगटन ने यह बात कही है.

बीते दिनों खबर आई थी कि ट्रंप प्रशासन एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रहा है जिसके अमल में आने के बाद पांच लाख से ज्यादा भारतीयों को अमेरिका में अपनी नौकरी छोड़कर देश लौटना पड़ सकता है. इस प्रस्ताव के अनुसार ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे लोगों के एच-1बी वीजा का विस्तार नहीं किया जाएगा. इस खबर ने इन भारतीयों के साथ आईटी क्षेत्र की तमाम बड़ी कंपनियों को भी चिंता में डाल दिया था.

अमेरिका का मौजूदा कानून विदेशी कामगारों को तीन साल का एच-1बी वीजा देता है. विस्तार के जरिये इसे अधिकतम छह साल तक बढ़ाया जा सकता है. यदि इस बीच कोई ग्रीन कार्ड (स्थायी निवासी बनने की पात्रता) के लिए अप्लाई करता है तो उसका एच-1बी वीजा लगभग अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया जाता है. इसके बाद वह अमेरिका में हमेशा के लिए रह सकता है और काम कर सकता है.

एच-1बी वीजा का मकसद मतलब अमेरिका में कुशल श्रमिकों की कमी को दूर करना था. लेकिन काफी समय से आरोप लग रहे हैं कि इसका इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकता पाने के लिए होने लगा है. हर साल दिए जाने वाले कुल 85 हजार एच-1बी वीजा में से 60 फीसदी भारतीय कंपनियों को दिए जाते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में इन्फोसिस के कुल कर्मचारियों में 60 फीसदी से ज्यादा एच 1बी वीजा धारक हैं. इसके अलावा वाशिंगटन और न्यूयॉर्क में रह रहे एच-1बी वीजा धारकों में करीब 70 प्रतिशत भारतीय हैं.