सुप्रीम कोर्ट ने सिनमा घरों में राष्ट्रगान को बजाने संबधी 2016 के अपने फैसले को बदल दिया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मंगलवार को शीर्ष अदालत ने कहा कि सिनेमा घरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य नहीं, बल्कि वैकल्पिक है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केंद्र 12 सदस्यों वाली एक समिति बनाएगा, जिसमें अलग-अलग मंत्रालयों के सदस्य होंगे और यही समिति सिनेमा घरों में राष्ट्रगान बजाने के बारे में अंतिम फैसला करेगी.

वहीं, जस्टिस डीवाई चंद्रचूण और जस्टिस एएम खानविल्कर ने कहा कि यह समिति सिनेमा घरों में राष्ट्रगान बजाने से जुड़े सभी पक्षों पर गौर करेगी. उन्होंने याचिकाकर्ताओं को इस समिति के सामने अपनी बातें रखने की भी इजाजत दे दी. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सिनेमा घरों में राष्ट्रगान बजाने के दौरान दिव्यांगों को खड़े होने से मिली छूट इस समिति द्वारा अगला कोई फैसला करने तक जारी रहेगी.

सुप्रीम कोर्ट ने 30 नवंबर 2016 को देश के सभी सिनेमा घरों को फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाने और वहां मौजूद सभी लोगों के खड़े होने को अनिवार्य बना दिया था. हालांकि, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में केंद्र सरकार ने इस मामले में 12 सदस्यीय समिति गठित करने और इसकी सिफारिश के आधार पर जरूरी नियम बनाने की बात कही. अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल का कहना था कि यह समिति छह महीने में अपनी रिपोर्ट सौंप देगी.