चीन ने थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत की टिप्पणी पर चुप्पी साध ली है. सोमवार को जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि डोकलाम क्षेत्र में चीनी सैनिकों की संख्या में कमी आई है. उन्होंने यह बात अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के पास भारतीय हिस्से में चीनी सैनिकों द्वारा सड़क निर्माण का काम रोकने पर सहमत होने के बाद कही थी. इस बारे में जब चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग से पूछा गया तो वे बात टाल गए. उन्होंने डोकलाम को चीन का हिस्सा बताया जो हमेशा से उसके अधिकार क्षेत्र में रहा है. उन्होंने यह बात भी दोहराई कि भारत के पूर्वी हिस्से की सीमा पर दोनों देशों के बीच विवाद है जिसे आम राय लेकर ऐतिहासिक सीमा समझौतों के आधार पर सुलझाना चाहिए.

अंतरराष्ट्रीय सीमा को लेकर चीन का अपने कई पड़ोसी देशों के साथ विवाद है जिनमें भारत भी शामिल है. अरुणाचल प्रदेश को चीन वर्षों से दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता रहा है. इसी तरह सिक्किम सीमा से सटे डोकलाम पर चीन अपना दावा ठोकता है जबकि इसे भूटान अपना क्षेत्र कहता है. सामरिक लिहाज से भारत के लिए बेहद अहम इस क्षेत्र में पिछले साल चीन ने सड़क बनाने की कोशिश की थी. इसका भारत ने विरोध किया. इसके बाद दोनों देशों के सैनिक 73 दिनों तक आमने-सामने रहे थे. यह गतिरोध 28 अगस्त को खत्म हुआ था.