सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने संबधी 2016 के अपने फैसले को बदल दिया है. मंगलवार को शीर्ष अदालत ने कहा कि सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य नहीं, बल्कि वैकल्पिक है. सुप्रीम कोर्ट ने 30 नवंबर 2016 को देश के सभी सिनेमाघरों को फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाने और वहां मौजूद सभी लोगों के खड़े होने को अनिवार्य बना दिया था. सोशल मीडिया पर एक बड़े तबके ने इस फैसले का स्वागत किया है. फेसबुक परज्ञानेंद्र मिश्रा की पोस्ट है, ‘सिनेमाहॉल में राष्ट्रगान बजाना वैसा ही है जैसे किसी आपत्तिजनक स्थान पर झंडा फहराना... इसलिए सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्वागत योग्य है.’

इस फैसले के चलते आज सोशल मीडिया पर नागरिकों में देशभक्ति जगाने के तौर-तरीकों पर भी बहस चल रही है. ट्विटर हैंडल @Visa83949083 पर सवाल उठाया गया है, ‘… इतने सालों तक सिनेमाघरों में राष्ट्रगान नहीं बजा तो क्या इस दौरान लोग राष्ट्रभक्त नहीं थे?’ वहीं इस फैसले पर एक यूजर ने चुटकी ली है, ‘सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फिल्म दिखाने के पहले राष्ट्रगान बजाने की अनिवार्यता नहीं है. अब यह देखने वाली बात होगी कि कौन से सिनेमाघर का मालिक अपने को ज्यादा देशभक्त साबित करता है!’

सोशल मीडिया में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर आई कुछ और टिप्पणियां :

सुखदीप सिंह | facebook/suhi88

सुप्रीम कोर्ट का फैसला अच्छा है... लेकिन इस अतिराष्ट्रवाद वाले दौर में कितने सिनेमाहॉल होंगे जो राष्ट्रगान बजाना बंद करके राष्ट्रद्रोही कहलाने का जोखिम मोल लेंगे.

बीम्यूज्ड | @make_itpossible

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि सिनेमाघरों में फिल्म दिखाने के पहले राष्ट्रगान बजाने की जरूरत नहीं है, हां लेकिन अपनी मूवी टिकट के साथ आधार लिंक करना अनिवार्य है.

कप्तान | facebook/kaptaancartoonist

पन्स्टर | @Pun_Starr

सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने की अनिवार्यता खत्म कर दी है. अब भक्त यहां फिल्में देखना छोड़ देंगे.

साध्वी खोसला | @sadhavi

...अब फर्जी देशभक्तों के लिए सुप्रीम कोर्ट भी देशद्रोही हो जाएगा.

नाओमी दत्ता | @nowme_datta

आपको सिनेमाघरों में जबर्दस्ती के महंगे पॉपकॉर्न खाने के लिए ही मजबूर किया जाना चाहिए, देशभक्ति जगाने के लिए नहीं.