नए साल का पहला दिन पूरी दुनिया और ख़ास कर कोरियाई प्रायद्वीप के लोगों के लिए अच्छी खबर लाया. इस दिन उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग-उन ने सभी को चौंकाते हुए दक्षिण कोरिया के सामने बातचीत का प्रस्ताव रखा. किम का कहना था कि दोनों देशों को शांति और स्थिरता के लिए साथ काम करने की जरूरत है क्योंकि एक ही संस्कृति और सभ्यता को मानने वाले दोनों कोरियाई देशों के लोग भी ऐसा ही चाहते हैं. किम ने तनाव को कम करने की ओर पहला कदम भी बढ़ा दिया और अगले महीने दक्षिण कोरिया में होने वाले शीतकालीन ओलंपिक में अपने एथलीट भेजने का प्रस्ताव रख दिया.

किम के संबोधन से पहले दुनिया भर के विशेषज्ञों का मानना था कि उनका नए साल का भाषण केवल 2017 को अपनी सबसे बड़ी सफलता बताने और जापान-अमेरिका को धमकाने तक ही सीमित होगा. लेकिन इसके उलट उत्तर कोरिया के शासक के भाषण का आधे से ज्यादा हिस्सा केवल शांति बनाए रखने पर केंद्रित था. यही वजह है कि इस भाषण ने अंतरराष्ट्रीय मामलों के कई विशेषज्ञों को भी चौंका दिया.

कड़े प्रतिबंधों से उत्तर कोरिया के हालात बिगड़े

हालांकि, कई जानकार ऐसे भी हैं जिनका मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया को लेकर जो रणनीति अपना रखी थी उसे देखते हुए एक न एक दिन ऐसा होना ही था. इन लोगों की मानें उत्तर कोरिया के रुख में नरमी की बड़ी वजह डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गये प्रतिबंध हैं जिन्होंने उत्तर कोरियाई अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है. अगर किम के इस भाषण पर ही गौर करें तो इसमें उनकी चिंता साफ़ झलकती है. उन्होंने कई बार देश की कमजोर आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कृषि और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को उठाने की जरूरत पर जोर दिया है. साथ ही उद्योग चलाने वालों से बिजली बचाने और स्थानीय कच्चे माल के जरिये ही ज्यादा उत्पादन करने की भी अपील की है. जानकारों की मानें तो इससे साफ़ पता चलता है कि उत्तर कोरिया प्रतिबंधों की वजह से संकट से जूझ रहा है क्योंकि किसी देश के शासक को अपने अपने भाषण में अमूमन ऐसा कहते हुए नहीं सुना जाता.

उत्तर कोरिया में रह चुके ब्रिटेन के पूर्व उच्चायुक्त जॉन एवरर्ड एक अमेरिकी न्यूज़ एजेंसी को बताते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप से पहले आए अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने भी उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगाए थे. लेकिन, इस मामले में उनमें और डोनाल्ड ट्रंप में बड़ा अंतर यह देखा गया कि ट्रंप ने प्रतिबंधों को कड़े करने और सख्ती से लागू कराने पर जोर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगभग हर दिन उत्तर कोरिया पर स्थिति का जायजा लेते हैं. उन्होंने न केवल सहयोगी देशों से प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करवाया है बल्कि चीन से उत्तर कोरिया को मिलने वाली राहत भी काफी हद तक बंद कराने में सफलता पाई है.

सोल स्थित कोरिया इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल इकनॉमिक पॉलिसीज के वरिष्ठ विश्लेषक लिम सू-हो एक साक्षात्कार में कहते हैं कि ट्रंप के दबाव के चलते पहले बीते सितंबर में चीन ने उत्तर कोरिया जाने वाले डीजल और गैस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया.उसके बाद नवंबर में यूएन ने उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध कड़े करते हुए उसे होने वाले पेट्रोलियम पदार्थों के निर्यात में करीब 90 फीसदी की कटौती का फैसला ले लिया. सू-हो के मुताबिक इसके बाद ही साफ़ हो गया था कि 2018 में उत्तर कोरिया की आर्थिक स्थिति अपने सबसे बुरे दौर में पहुंचने वाली है क्योंकि चीन हमेशा से उसके लिए एक आखिरी उम्मीद की तरह था.

दक्षिण कोरियाई जानकारों का मानना है कि उत्तर कोरिया दक्षिण कोरिया के जरिये अपनी अर्थव्यवस्था को जल्द ही पटरी पर लाने की सोच रहा है. माना जा रहा है कि उसका अगला कदम गेसांग के संयुक्त औद्योगिक क्षेत्र को शुरू करवाने को लेकर होगा. उत्तर कोरिया में स्थित 120 से अधिक दक्षिण कोरियाई कारखानों वाला यह क्षेत्र उत्तर कोरिया के राजस्व का प्रमुख स्रोत था जिसे दक्षिण कोरिया ने 2015 में बंद करवा दिया था. दक्षिण कोरिया के इन कारखानों में करीब 60 हजार उत्तर कोरियाई नागरिक काम करते थे.

डोनाल्ड ट्रंप का डर

जॉन एवरर्ड एक और बात भी बताते हैं. वे कहते हैं कि भले ही उत्तर कोरिया ऊपर से यह दिखाता हो कि उसे किसी से भी डर नहीं लगता, लेकिन अंदर स्थिति इससे एकदम उलट है. उत्तर कोरिया में पिछले महीने ऐसा देखने को भी मिला जब संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारी जेफरी फेल्टमैन ने प्योंगयांग का दौरा किया. फेल्टमैन की मानें तो लगभग सभी उत्तर कोरियाई अधिकारियों में ट्रंप का डर साफ़ देखा जा सकता था. वे सभी अमेरिकी राष्ट्रपति के मिजाज को लेकर बेहद चिंतित थे. फेल्टमैन बताते हैं कि ये अधिकारी उत्तर कोरिया को लेकर ट्रंप की गंभीरता और फैसला लेने के तौर तरीकों को जानना चाहते थे. अधिकारियों ने उनसे कई बार यह बात पूछी कि क्या ट्रंप वाकई उनके देश पर सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं. एवरर्ड उत्तर कोरियाई अधिकारियों के ऐसे व्यवहार का कारण डोनाल्ड ट्रंप के उस मिजाज को मानते हैं जिसके बारे में कहा जाता है कि वे कब क्या फैसला ले लें कोई नहीं जानता.

भविष्य में अमेरिका से बातचीत होने की संभावना

दक्षिण कोरियाई मीडिया की मानें तो दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच अंदर-अंदर कई दिनों से बातचीत चल रही थी. इसी में उत्तर कोरिया ने शुरूआती तौर पर उसकी सीमा पर अमेरिका सेना का युद्धाभ्यास रोकने और शीतकालीन ओलंपिक में उसे शामिल करने की बात रखी. यह भी बताया जाता है कि उत्तर कोरिया की इन मांगों पर डोनाल्ड ट्रंप से सहमति मिलने के बाद ही किम जोंग ने नए साल के संबोधन में शीतकालीन ओलंपिक में अपने एथलीट भेजने की बात कही.

कुछ जानकार एक और बात भी कहते हैं कि बीते दिसंबर में जब उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच अंदर खाने बातचीत हो रही थी उस समय दक्षिण कोरियाई सरकार की ओर से एक बयान आया था. इसमें कहा गया था कि 2018 में उत्तर कोरिया और उसके संबंध बेहतर हो सकते हैं और नए साल के भाषण में किम जोंग अच्छे संबंधों की शुरुआत के संकेत दे सकते हैं. जानकारों की मानें तो इससे साफ़ पता चलता है कि अंदर खाने बातचीत के बाद दक्षिण कोरिया को पता था कि किम जोंग नए साल पर क्या बोलने वाले हैं.

ये लोग आगे बताते हैं कि उत्तर कोरियायाई सरकार की तरफ से जब यह बात कही गई थी तब उसने यह संभावना भी जतायी थी कि 2018 में उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच बातचीत हो सकती है. बयान के मुताबिक उत्तर कोरिया की इस बातचीत का आधार परमाणु सम्पन्न देश के तौर पर अंतरराष्ट्रीय अनुमति पाना होगा. जानकार कहते हैं कि अब जब दक्षिण कोरियाई सरकार का एक बयान सही साबित हो चुका तो उसके बाद ऐसा माना जा सकता है कि अगर उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच संबंध अच्छे बने रहे तो 2018 में उत्तर कोरिया और अमेरिका भी बातचीत की मेज पर दिख सकते हैं. बुधवार को अमेरिकी विदेश विभाग का बयान भी आया है कि आगे बातचीत की प्रक्रिया में वह भी शामिल होना चाहेगा.

इन दिनों कोरियाई प्रायद्वीप में एक चर्चा काफी आम है कि नववर्ष पर उत्तर कोरियाई शासक का भाषण उनके आमतौर पर दिए जाने वाले भाषणों से काफी छोटा था जिसमें उन्होंने चौंकाते हुए अमेरिका को न के बराबर ही कोसा. यह भी कहा जा रहा है कि दिसंबर के अंत में अंदरखाने चल रही बातचीत के एक नतीजे पर पहुंचने के बाद ही इस भाषण को काटा गया था और इसमें से अमेरिका और जापान को धमकाने वाला हिस्सा हटाया गया था.

इस पूरे घटनाक्रम को अधिकांश दक्षिण कोरियाई उत्तर कोरिया के अमेरिका को लेकर नरम हो रहे रुख के संकेत की तरह देखते हैं. उधर, अमेरिका के रुख में भी नरमी देखी जा रही है. गुरुवार को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा भी कि अमेरिका उत्तर कोरिया से सही समय और सही परिस्थिति में बातचीत के लिए तैयार है. यह बात उन्होंने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून-जे-इन ने फोन पर बात करते हुए कही. माना जा रहा है कि इन सब घटनाक्रमों को कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव खत्म होने की नींव की तरह देखा जा सकता है.

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