सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सिनेमाघरों में राष्ट्रगान को बजाने संबधी एक साल पहले के अपने फैसले को बदल दिया है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य नहीं बल्कि, वैकल्पिक है. साथ ही, शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र 12 सदस्यों वाली एक समिति बनाएगा, जिसमें अलग-अलग मंत्रालयों के सदस्य होंगे. इस समिति को सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने के बारे में अंतिम फैसला लेने की जिम्मेदारी दी गई है.

मदरसे बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से वंचित करने के जिम्मेदार बन गए हैं : शिया वक्फ बोर्ड

शिया वक्फ बोर्ड ने शिक्षा प्रणाली को लेकर देश में स्थित मदरसों पर निशाना साधा है. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने इस बारे में प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने कहा है कि मदरसों की प्राथमिकता धार्मिक शिक्षा देना है लेकिन, ये बच्चों को मुख्य धारा की शिक्षा से वंचित करने के जिम्मेदार बन गए हैं. इसके अलावा अलग-अलग संस्थाओं की रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा है कि मदरसों में प्रशिक्षित शिक्षक नहीं है. साथ ही, छात्र और शिक्षक अनुपात में बहुत बड़ा अंतर है. प्रधानमंत्री के अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को लिखे पत्र में उन्होंने मदरसा बोर्ड को खत्म कर पंजीकृत मदरसों को सामान्य शिक्षा वाले स्कूल में बदलने की मांग की है.

लोकतंत्र में बर्दाश्त करना सीखना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि लोकतंत्र में बर्दाश्त करना सीखना चाहिए और मामूली गलत रिपोर्टिंग के लिए प्रेस को मानहानि के मामलों में नहीं घसीटना चाहिए. दैनिक जागरण में छपी खबर के मुताबिक शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी पटना हाई कोर्ट द्वारा एक पत्रकार और मीडिया संस्थान के खिलाफ मानहानि के मामले को खारिज करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा, ‘किसी घोटाले के आरोप की रिपोर्टिंग में थोड़ी गलती या उत्साह दिखाया जा सकता है लेकिन, हमें प्रेस को अभिव्यक्ति की आजादी देनी चाहिए.’ साथ ही, शीर्ष अदालत ने गलत रिपोर्टिंग की गुंजाइश होने से इनकार नहीं किया है.

कंपनियों को जरूरत के मुताबिक ठेके पर कर्मचारियों को नियुक्त करने संबंधी मसौदा अधिसूचना जारी

मोदी सरकार ने कंपनियों को जरूरत के मुताबिक एक खास अवधि के लिए कर्मचारियों को नियुक्त करने संबंधी एक मसौदा अधिसूचना जारी कर दी है. इससे कंपनियों को जरूरत के मुताबिक कर्मचारियों को काम पर रखने और काम पूरा होने के बाद बिना नोटिस के निकालने की सुविधा मिल जाएगी. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने अभी तक केवल टेक्सटाइल क्षेत्र में इस तरह की अनुमति दी थी. इससे पहले केंद्रीय कैबिनेट ने फुटवियर, चमड़ा और एक्सेसरीज क्षेत्र में भी इसे लागू करने को मंजूरी दी थी. सरकार का कहना है कि इससे भारी विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा.

पश्चिम बंगाल : कम कीमत को देखते हुए किसानों का कोल्ड स्टोरेज से आलू निकालने से इनकार

उत्तर प्रदेश की तरह पश्चिम बंगाल के किसान भी आलू की कम कीमतों को लेकर संकट का सामना कर रहे हैं. द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में आलू पैदा करने वाले किसानों द्वारा कोल्ड स्टोरेज से आलू निकालने को लेकर अनिच्छा जाहिर करने की बात सामने आई है. बताया जा रहा के कम कीमतों के चलते न लागत निकल पा रही है और कोल्ड स्टोरेज का किराया देने के भी लाले हैं. पूर्व वर्द्धमान जिले के शेख मोफीजुल ने अखबार को बताया, ‘मैंने आलू की खेती करने के लिए गहने और कुछ खेत गिरवी रख दिए थे लेकिन, अब इसकी कीमत में गिरावट आ गई है. मेरे पास अपनी संपत्ति वापस हासिल करने के लिए कोई रास्ता नहीं है.’ उधर, सीपीआई-एम का किसान संगठन प्रादेशिक कृषक सभा ने इस संकट के लिए सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है.

आज का कार्टून

समलैंगिकता और राष्ट्रगान संबंधी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों पर द टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित कार्टून :