यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (वाईएआईडीए) ने कहा है कि खरीदारों और निवेशकों से प्राप्त करीब एक हजार करोड़ रुपये बिल्डरों ने दूसरी योजनाओं में लगा दिए, इसलिए वे तय वक्त पर मकानों की डिलिवरी नहीं दे सके. प्राधिकरण ने यह बात बिल्डरों के खातों की जांच करने के बाद तैयार एक रिपोर्ट के आधार पर मंगलवार को कही.

पिछले साल 12 सितंबर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण से यह पता लगाने को कहा था कि आखिर क्यों बिल्डर तय वक्त पर मकान नहीं दे पा रहे. इसके बाद वाईएआईडीए के सहायक मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमरनाथ उपाध्याय की अध्यक्षता में पांच सदस्यों की एक समि​ति बनाई गई. इसने एक अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ‘करी ऐंड ब्राउन’ के साथ मिलकर बिल्डरों के खातों की जांच की. समिति ने 23 बिल्डरों में से पांच के खातों में गड़बड़ी पाई जिन्होंने घर देने के नाम पर मिली रकम का इस्तेमाल निर्माण कार्य की बजाय दूसरे कामों पर कर दिया. ऐसे बिल्डरों ने जांच में सहयोग भी नहीं किया.

इस रिपोर्ट को अध्ययन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण वीर सिंह को दिया गया है जिसे वे प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉक्टर प्रभात कुमार को सौंपेंगे. डॉक्टर कुमार ने दोषी बिल्डरों के खिलाफ कड़ी कारवाई का भरोसा दिलाया है.

बता दें कि वाईएआईडीए ने विभिन्न बिल्डरों को साल 2009-10 में रिहाइशी प्रोजेक्टों के लिए जमीन दी थी जिन्हें साल 2013-14 तक पूरा किया जाना था. यहां मौजूद करीब 28 प्रोजेक्ट्स में लगभग 16 हजार खरीदारों ने निवेश कर रखा है.