बॉलीवुड में इन दिनों सामाजिक मुद्दों पर संदेश देने वाली फिल्मों का दौर चल रहा है. लेकिन फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप का मानना है कि फिल्में न तो स्वयंसेवी संस्थाएं हैं और न ही उनका मकसद परोपकार है इसलिए उनमें संदेश की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. उनका तर्क है कि बॉलीवुड दशकों से प्रेम कथाओं पर आधारित फिल्में बना रहा है, लेकिन प्रेम की सही परिभाषा से दर्शक आज भी अनजान लगते हैं.

अनुराग कश्यप की अगली फिल्म ‘मुक्काबाज’ जल्द ही रूपहले पर्दे पर दिखेगी. इस फिल्म का संबंध खेल से है लेकिन अनुराग के मुताबिक यह बॉक्सिंग का विज्ञापन करती नहीं नजर आएगी बल्कि यह दर्शकों को आईना दिखलाने वाली जरूर होगी. जब उनसे इन दिनों विवाद का विषय बनी फिल्म पद्मावत (पहले पद्मावती) पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा लगाए गए कट के संबंध में सवाल किया गया तो उनका कहना था, ‘सीबीएफसी को फिल्म में कट नहीं लगाने चाहिए, इस दिशा में मेरे साथ कई दूसरे लोग भी पूरे प्रयास कर रहे हैं. लेकिन इस काम में कुछ समय तो जरूर लगेगा.’