केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्कूलों में सुबह के समय होने वाली प्रार्थना के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. उससे इस पर जवाब मांगा गया है कि इन स्कूलों में एक ही धर्म को बढ़ावा देने वाली प्रार्थना क्यों कराई जाती है. जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस नवीन सिन्हा की बेंच ने इसे गंभीर संवैधानिक मुद्दा भी बताया है.

केंद्रीय विद्यालयों में सुबह के समय होने वाली प्रार्थना में संस्कृत के कुछ श्लोकों जैसे ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय असतो मा सद्गमय...’ के अलावा हिंदी में एक भजन ‘दया कर दान विद्या का हमें परमात्मा देना...’ गाया जाता है. प्रार्थना के दौरान बच्चे पंक्तिबद्ध होकर हाथ जोड़ते हुए पलकें मूंदकर इसे गाते हैं. इस पर एक वकील विनायक शाह ने आपत्ति जताई है और उसे संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ बताया है.

विनायक शाह ने शीर्ष अदालत में दायर याचिका में कहा है कि केंद्रीय विद्यालयों में वर्ष 1964 से हिंदी और संस्कृत भाषा में प्रार्थना कराई जा रही है. उनकी दलील है कि संविधान का अनुच्छेद 25 और 28 भी इसकी अनुमति नहीं देता. उनके अनुसार क्योंकि इन स्कूलों को सरकार से सहायता दी जाती है ऐसे में उन्हें धार्मिक मान्यताओं और एक संप्रदाय विशेष को बढ़ावा नहीं देना चाहिए. उनके अनुसार इस तरह की प्रार्थनाएं वैज्ञानिक चेतना के विकास में बाधा खड़ी करती हैं.