नोटबंदी, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और रियल एस्टेट रेगुलेशन ऐक्ट (रेरा) के चलते देश भर के विभिन्न शहरों में आवासीय संपत्तियोंं के दामों में औसतन तीन प्रतिशत की कमी आई है. यह बात वैश्विक स्तर पर रियल एस्टेट परामर्श सेवाएं देने वाली कंपनी नाइटफ्रेंक ने अपनी एक रिपोर्ट में कही है. उसके मुताबिक मकानों के दाम सबसे ज्यादा महाराष्ट्र के दो शहरों में घटे हैं. पुणे में सात फीसदी जबकि मुंबई में पांच फीसदी तक घर खरीदना सस्ता हुआ है. दूसरी तरफ, दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ वर्षों से कीमतें लगातार गिर रही हैं और साल 2017 में भी इनमें दो प्रतिशत की कमी देखने को मिली है.

संपत्तियों की कीमत में इस कमी की सबसे बड़ी वजह मांग में हुई कमी को बताया गया है. आईटी सेक्टर का गढ़ कहे जाने वाले बेंगलुरु में मकानों की मांग 26 प्रतिशत घटी है जो कि देश भर में सबसे अधिक है. इसके बाद 20 प्रतिशत की कमी के साथ चेन्नई दूसरे पायदान पर है. दिल्ली-एनसीआर में भी लोगों ने मकान खरीदने में बहुत ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया जिससे यहां भी छह प्रतिशत तक मांग घटी और बिक्री प्रभावित हुई.

साल 2017 में दिल्ली-एनसीआर में बिल्डरों को केवल 37,653 यूनिट बेच पाने में ही सफलता मिल सकी. मकानों की मांग और बिक्री में कमी का सीधा असर नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की घोषणाओं पर भी पड़ा. दिल्ली-एनसीआर में नए प्रोजेक्ट्स की लांचिंग में 56 फीसदी जबकि बेंगलुरु में 41 फीसदी की रिकॉर्ड कमी दर्ज हुई है.

रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान एक अच्छी बात यह हुई है कि बीते कुछ वर्षों में बिल्डरों ने सस्ते मकानों के निर्माण में ज्यादा रुचि लेना शुरू किया है. इसकी बड़ी वजह प्रधानमंत्री आवास योजना को माना गया है. साल 2017 में कुल मकानों के निर्माण में सस्ते आवासों की हिस्सेदारी बढ़कर 87 प्रतिशत तक आ पहुंची है जो 2016 में 53 फीसदी ही थी.