अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को खेती की समस्याएं सुलझाने, नौकरियां पैदा करने और राजकोषीय प्रबंधन को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह सलाह उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली सहित कैबिनेट के उनके कई सहयोगियों के साथ एक बैठक में दी. बुधवार को हुई इस बैठक का मकसद बजट से पहले अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों से सलाह लेना था.

अर्थशास्त्रियों ने कहा कि सरकार रोजगार सृजन पर ध्यान दे और कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) कार्यक्रमों की जांच कर उनमें सुधार करे. उन्होंने यह भी कहा कि कॉरपोरेट टैक्स की मौजूदा दर (30 प्रतिशत) को कम करने की जरूरत है. विशेषज्ञों ने उत्पादकता के साथ-साथ आय, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा को बेहतर किए जाने की भी बात कही.

सूत्रों ने बताया कि विशेषज्ञों ने दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर पर की नीति वापस लाने का भी सुझाव दिया है. साथ ही छोटी अवधि में होने वाले पूंजीगत लाभ के मामले में अवधि का विस्तार एक साल से तीन साल किए जाने का सुझाव भी आया. विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि सरकार को राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को लेकर दृढ़ रहना चाहिए.

सूत्रों के मुताबिक बैठक में सरकार से साफ कहा गया कि कृषि क्षेत्र के तहत ग्रामीण इलाकों में नौकरियां पैदा की जाएं, खेती से संबंधित उत्पादों के लिए जिला स्तर पर काम हो, खेती करने के तरीके में बदलाव किया जाए और किसान और बाजार के बीच तालमेल सुधारा जाए.

बैठक में मौजूद अर्थशास्त्री व प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य एम गोविंद राव ने कहा, ‘हमें कृषि, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और दूसरी चीजों में और निवेश करने की जरूरत है.’ वहीं, राजकोषीय मजबूती को लेकर राव ने कहा कि सरकार को सब्सिडी में कमी करनी चाहिए और पूंजीगत खर्च बढ़ाना चाहिए. उनके मुताबिक ऐसा तभी हो सकता है जब सरकार विनिवेश जैसी कवायदों में भारी इजाफा करे.