बाजार नियामक सेबी ने ऑडिटिंग फर्म प्राइस वॉटरहाउस नेटवर्क (पीडब्ल्यू) पर दो साल का प्रतिबंध लगा दिया है. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक उसने यह फैसला 2009 में सामने आए सत्यम घोटाले में पीडब्ल्यू की कथित भूमिका के संबंध में लिया है. इस साल अप्रैल से पीडब्ल्यू शेयर बाजार की सूची में शामिल किसी भी कंपनी का ऑडिट नहीं कर पाएगी. यह प्रतिबंध अगले दो साल तक लगा रहेगा.

सेबी ने यह भी कहा कि पीडब्ल्यू को 13.09 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष (2009 से अब तक) 12 प्रतिशत ब्याज दर के साथ चुकाने होंगे. इसके अलावा पीडब्ल्यू में साझेदार सीए एस गोपालकृष्णन और श्रीनिवास तल्लुरी पर भी कंपनियों को ऑडिट सर्टिफिकेट देने को लेकर पाबंदी लगा दी गई है. ये दोनों अगले तीन साल तक इस तरह का सर्टिफिकेट जारी नहीं कर सकेंगे. सत्यम घोटाला सामने आने के बाद ये दोनों सीए कंपनी की ऑडिटिंग करने के दोषी पाए गए थे.

उधर, पीडब्ल्यू की तरफ से एक बयान जारी किया गया है. इसमें उसने सेबी की जांच और उसके फैसले पर नाराजगी जाहिर की है. बयान में कहा गया है घोटाले में उसकी कोई भूमिका नहीं थी. पीडब्ल्यू ने कहा है, ‘हम 2009 से कह रहे हैं कि सत्यम घोटाले में पीडब्ल्यू की तरफ से जान-बूझकर कोई गलत काम नहीं किया गया और न ही हमने इसके विरुद्ध कोई महत्वपूर्ण साक्ष्य ही देखा है.’ पीडब्ल्यू ने यह भी कहा कि सेबी का आदेश बॉम्बे हाई कोर्ट के 2011 में दिए निर्देशों के मुताबिक भी नहीं है.

प्राइस वॉटरहाउस बेंगलुरु ने साल 2000 से 2008 के बीच सत्यम कंपनी के कंप्यूटरों का ऑडिट किया था. सेबी इसी ऑडिट को लेकर पीडब्ल्यू की भूमिका की जांच कर रहा है. साल 2009 में सत्यम के संस्थापक बी रामालिंगा राजू ने माना था कि कंपनी के खातों में कई सालों तक अरबों रुपयों की हेराफेरी की गई थी. रिपोर्टों के मुताबिक 54 अरब रुपये की हेराफेरी हुई थी. मामला सामने आने के बाद रामालिंगा राजू को जेल भी जाना पड़ा था.