हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नवगठित सरकार ने भी उत्तर प्रदेश की तरह ‘राजनीतिक फायदे’ के लिए दर्ज मुकदमों को वापस लेने का फैसला किया है. ये मुकदमे पिछली कांग्रेस सरकार ने दर्ज करवाए थे. इनमें पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता प्रेम कुमार धूमल और उनके बेटे और सांसद अनुराग ठाकुर के खिलाफ चल रहे पांच मामले भी शामिल हैं. ये मामले हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) को जमीन आवंटित करने से जुड़े हैं. इन मामलों में कांग्रेस आरोप लगाती रही है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने 2002 के दौरान नियमों को ताक पर रखकर क्रिकेट एसोसिएशन को जमीन आवंटित की थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने खबर दी है कि यह फैसला प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई मंत्रियों की एक बैठक में किया गया. इस फैसले के अलावा बैठक में कुछ अन्य अहम फैसले भी हुए जिनके तहत अब राज्य में शराब उद्योग का संचालन करने वाली हिमाचल प्रदेश बेवरेज लिमिटेड (एचपीबीएल) को समाप्त करने निर्णय शामिल है. एचपीबीएल ने पिछले साल से ही काम करना शुरू किया था. इस कंपनी के निर्माण का फैसला पिछली कांग्रेस सरकार ने लिया था और भाजपा के मुताबिक इस कदम के चलते शराब कारोबार में अनियमितताएं देखी जा रही थीं.

मंत्रिमंडल की यह बैठक किसानों के लिए भी राहत की खबर लाई है. प्रदेश में बड़े स्तर पर पैदा होने वाले नींबू वंश के खट्टे फलों जैसे संतरा, कीनू, गलगल और मालटा के लिए सरकारी खरीद के नए दाम तय किए गए हैं. इनका न्यूनतम समर्थन मूल्य अब 5.50 रुपये से 7 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच तय किया गया है.