जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की सख़्ती जारी है. बल्कि कुछ और बढ़ाई ही जाने वाली है. द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पूर्व में ग़िरफ़्तार किए गए कुछ अलगाववादी नेताआें पर सरकार अब सख़्त आतंक निरोधी कानून के तहत मुक़दमा चलाने की तैयारी कर रही है.

अख़बार के मुताबिक़ कश्मीर के नौ अलगाववादी नेताओं के ख़िलाफ़ एक सप्ताह के भीतर यूएपीए एक्ट (ग़ैरकानूनी गतिविधि निरोधक कानून) के तहत मुक़दमा शुरू किया जा सकता है. इनमें हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्‌टरपंथी गुट के नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद अल्ताफ़ फंतोष भी शामिल हैं. इन सभी को कश्मीर में आतंकी गतिविधियां फैलाने और पत्थरबाज़ी कराने के लिए पाकिस्तान के धन लेने के आरोप में पिछले साल जुलाई में ग़िरफ़्तार किया गया था.

सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को पिछले हफ़्ते राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से इस तरह का आग्रह मिला है. क्योंकि यूएपीए के तहत किसी पर मुक़दमा चलाने से पहले पूर्व मंज़ूरी अनिवार्य होती है. बताया जाता है कि मंत्रालय ने इस बाबत एनआईए का आवेदन विचार के लिए दो सदस्यीय प्राधिकरण के पास भेज दिया है. इसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज डॉक्टर सतीश चंद्रा और पूर्व विधि सचिव टीके विश्वनाथन शामिल हैं.

सूत्रों की मानें तो ज़रूरी मंज़ूरी मिलते ही एनआईए इस महीने के अंत तक अलगाववादी नेताओं के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दाख़िल कर देगी. इसमें फंतोष के अलावा कश्मीर के कारोबारी ज़हूर अहमद शाह वटाली. नईम खान, राजा मेहराजुद्दीन कलवल, बशीर अहमद भट उर्फ़ सैफ़ुल्लाह, आफ़ताब हिलाली शाह उर्फ़ शाहिद उल-इस्लाम, फारूक़ अहमद डार उर्फ़ बिट्‌टा कराटे, जावेद अहमद भट, मोहम्मद अकबर खांडे उर्फ़ अयाज़ अकबर के नाम शामिल हैं.