भारतीय रेल में नियुक्तियों के नाम पर फर्जीवाड़े का एक नया मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि टिकट कलेक्टर पद के लिए कुछ फर्जी इंटरव्यू हुए और जाली नियुक्ति पत्र भी जारी कर दिए गए. हैरानी की बात यह भी है कि यह सारा फर्जीवाड़ा रेल मंत्रालय के मुख्यालय में हुआ. नियुक्ति पत्रों पर संदेह न हो इसलिए उन पर रेल मंत्री के फर्जी हस्ताक्षर भी करा लिए गए. अब रेलवे मामले की जांच में जुटा है.

मामला तब खुला जब कुछ दिन पहले सात लोग अपने नियुक्ति पत्र लेकर दिल्ली के डिविजनल मुख्यालय पहुंचे. वहां उन्हें पता चला कि ये नियुक्ति पत्र फर्जी हैं. इन लोगों ने हालांकि अब तक पुलिस में शिकायत नहीं दी है.

कुछ समय पहले भी इस तरह का एक मामला सुर्खियों में रहा था. बीते साल राजकुमार नामक एक पीड़ित ने दिल्ली के संसद मार्ग थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी. इसमें उसने कहा था कि टिकट कलेक्टर की नौकरी दिलाने में भूषण शर्मा नाम के एक व्यक्ति ने उसकी मदद की थी जिसके बदले उसने उसे पांच लाख रुपये दिए थे. राजकुमार का कहना था कि एक रेल यात्रा के दौरान उसकी मुलाकात भूषण शर्मा के साथ हुई थी जिसने अपना परिचय एक रेल अधिकारी के तौर पर दिया था. राजकुमार के मुताबिक उसका इंटरव्यू रेल भवन के कमरा नंबर नौ में हुआ था. उसे रेलवे मैकेनिकल सेवाओं के 1992 बैच के अधिकारी राजेश गुप्ता की तरफ से नियुक्ति पत्र दिया गया था. दूसरी तरफ भारतीय रेल ने ऐसे किसी अधिकारी के न होने की बात कही थी.

शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने मामले की छानबीन की थी, लेकिन उस कमरे में सीसीटीवी न होने से इंटरव्यू लेने वाले की पहचान नहीं पाई थी. अब रेलवे खुद इस मामले की छानबीन कर रहा है. साथ ही सीसीटीवी की पुरानी फुटेज निकलवाने की कोशिश भी जारी है. इस फर्जीवाड़े में विभाग के कुछ लोगों के शामिल होने पर भी संदेह है क्योंकि अति सुरक्षित माने जाने वाले रेलवे मुख्यालय में किसी बाहरी के लिए अकेले यह सब कर पाना आसान नहीं.