स्वतंत्र भारत और सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार शीर्ष अदालत के चार जजों ने मीडिया के सामने आकर पूरे देश से सुप्रीम कोर्ट को बचाने की अपील की ताकि देश में लोकतंत्र बचा रह सके. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक शुक्रवार को जस्टिस मदन बी लोकुर, कुरियन जोसेफ, रंजन गोगोई और जे चेलामेश्वर ने जस्टिस जे चेलामेश्वर के सरकारी आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इन चारों जजों की तरफ से जस्टिस जे चेलामेश्वर ने कहा, ‘हमारी संस्था (सुप्रीम कोर्ट) और देश के लिए जिम्मेदारी है. सीजेआई (भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा) को इस संस्था (सुप्रीम कोर्ट) की रक्षा के लिए कदम उठाने के बारे में समझाने की हमारी कोशिशें नाकाम रही हैं.’

जस्टिस जे चेलामेश्वर ने आगे कहा, ‘हम लोग आज (शुक्रवार) सुबह ही भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलने गए और उन्हें समझाने की कोशिश की कि कुछ चीजें सही नहीं हैं और इन्हें सुधारने के लिए उनको कदम उठाना चाहिए. दुर्भाग्य से हम उन्हें नहीं समझा पाए.’ उन्होंने आगे कहा, ‘हम सब (चारों जज) मानते हैं कि जब तक इस संस्था (सुप्रीम कोर्ट) की रक्षा नहीं की जाती है और इसकी गंभीरता को बनाए नहीं रखा जाता है, इस देश में या किसी भी देश में लोकतंत्र नहीं बच पाएगा.’

जस्टिस जे चेलामेश्वर ने यह भी कहा, ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायाधीश एक अच्छे लोकतंत्र की पहचान होते हैं. न्यायाधीश यहां प्रतीकात्मक है, असल बात यह संस्था है.’ उन्होंने आगे कहा कि जजों को इसलिए सामने आना पड़ा है ताकि देश में लोकतंत्र बचा रह सके. जस्टिस जे चेलामेश्वर के मुताबिक बीते कुछ महीनों में ऐसी बहुत सी बातें हुई हैं, जिनकी जरूरत नहीं थी. जब जजों से पूछा गया कि क्या वे मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग की मांग करते हैं तो उन्होंने कहा, ‘इसे देश को तय करने दीजिए.’

इस तरह प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की वजह पर जस्टिस जे चेलामेश्वर ने कहा, ‘हम लोग नहीं चाहते कि आज से 20 साल बाद कोई यह कहे कि जस्टिस चेलामेश्वर, गोगोई, लोकुर और कुरियन जोसेफ ने अपनी आत्मा बेच दी थी और संविधान के हिसाब से काम नहीं किया था.’ उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में कामकाज ठीक से नहीं चल रहा है, इसलिए उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है.