अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने 11 जनवरी 2018 को पैन एम फ्लाइट 73 को हाईजैक करने वाले चार कथित अपहरणकर्ताओं की तस्वीरें जारी की थीं. इन लोगों ने पांच सितंबर 1986 को इस विमान का अपहरण कर उसमें मौजूद 20 यात्रियों की हत्या कर दी थी. इन अपहरणकर्ताओं के नाम हैं - मोहम्मद हाफिज अल-टर्की, जमाल सईद अब्दुल रहीम, मुहम्मद अब्दुल्लाह खलील हुसैन अर-रहय्यल और मुहम्मद अहमद अल-मुनावर. इस विमान के यात्रियों को बचाने की कोशिश करने वालीं एयर होस्टेस नीरजा भनोट भी इन आतंकियों की गोलियों का निशाना बन गई थीं.

एफबीआई ने जनवरी में जिन तस्वीरों को जारी किया था उन्हें एजेंसी की प्रयोगशाला में एज-प्रोग्रेशन टेक्नोलॉजी की मदद से तैयार किया गया था. इन तस्वीरों में चारों आतंकियों को अधेड़ उम्र का दिखाया गया है. एफबीआई को इन आतंकियों की असली तस्वीरें साल 2000 में मिली थीं. ये सभी आतंकी एफबीआई की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल हैं. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इनकी गिरफ्तारी कराने या अपराधी साबित करने वाली जानकारी देने वाले को 50 लाख डॉलर का इनाम देने की घोषणा की है.

अपहरण के बाद विमान में क्या हुआ था?

पांच सितंबर, 1986 को पैन एम फ्लाइट 73 ने मुंबई से उड़ान भरी थी. विमान को अमेरिका जाना था, लेकिन कराची में उतरते ही उसे हाईजैक कर लिया गया था. आतंकियों ने विमान में सवार 379 यात्रियों व चालक दल के सदस्यों की हत्या करने का प्रयास किया था. इस घटना में 20 लोग मारे गए थे और 100 से ज्यादा घायल हो गये थे. रिपोर्टों के मुताबिक हाईजैकर्स सुरक्षाकर्मियों की ड्रेस में विमान में घुसे थे. उन्होंने नीरजा भनोट को सारे यात्रियों के पासपोर्ट इकट्ठा करने का आदेश दिया था ताकि उनकी विदेशी नागरिकता के बारे में पता चल सके और इस आधार पर उन्हें निशाना बनाया जा सके. लेकिन इस मुश्किल घड़ी में भी नीरजा भनोट ने पूरी हिम्मत और सूझबूझ दिखाते हुए लगभग सभी यात्रियों को आपात द्वार से बाहर निकाल दिया. इसी दौरान आतंकियों ने नीरजा पर गोलियों की बौछार कर दी जिससे उनकी मौत हो गई.

मरने से पहले नीरजा भनोट 360 लोगों की जान बचा गई थीं. वे देश की पहली ऐसी नागरिक थीं जिन्‍हें अशोक चक्र जैसा सैनिक सम्‍मान दिया गया था. वहीं पाकिस्तान ने उन्हें ‘तमगा-ए-इंसानियत’ और अमेरिका ने उन्हें अपने दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘स्पेशल करेज अवॉर्ड’ से सम्मानित किया था.

अपहरणकर्ता तो पाकिस्तान की जेलों में बंद थे, फिर वे एफबीआई की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में कैसे आए -

जिन आतंकियों ने विमान का अपहरण किया था वे फिलिस्तीनी उग्रवादी समूह अबु निदाल के सदस्य थे. बचाव अभियान के दौरान पाकिस्तान के सुरक्षाबलों ने इन्हें अपने काबू में कर लिया था. इसके बाद इन सब पर वहां मुकदमा चला और इन्हें जेल भेज दिया गया. इनमें से एक जैद हसन अब्द अल-लतीफ मासूद अल सफारिनी को पाकिस्तान ने 2001 में रिहा कर दिया था, हालांकि एक दिन बाद ही एफबीआई ने उसे बैंकॉक से गिरफ्तार किया था.

वहीं, 2009 की एक रिपोर्ट के मुताबिक चार आतंकियों को उनकी सजा पूरी होने के बाद छोड़ दिया गया था. अमेरिका को इस पर आपत्ति थी लेकिन इसके बावजूद उन्हें उनके देश फिलस्तीन भेज दिया गया. एफबीआई द्वारा जारी तस्वीरें इन्हीं आतंकियों की हैं. हालांकि साल 2010 में पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों ने बताया था कि उत्तरी वजीरिस्तान में हुए एक ड्रोन हमले में रिहा किए गए एक आतंकी जमाल सईद अब्दुल रहीम की मौत हो गई है. लेकिन उसकी मौत की कभी पुष्टि नहीं हो पाई और इसलिए आज भी एफबीआई की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में उसका नाम भी शामिल है.