सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों द्वारा पहली बार मीडिया में आकर शीर्ष अदालत को बचाने की अपील करने पर प्रतिक्रियाओं का आना जारी है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, ‘वे लोग (चारों जज) बहुत ईमानदार व्यक्ति हैं और अपने कानूनी पेशे में बहुत त्याग किया है, क्योंकि अधिवक्ता के रूप में वे काफी पैसे कमा सकते थे.’ सुब्रमण्यम स्वामी ने आगे कहा कि शासन प्रमुख होने के नाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले में दखल देना चाहिए.

शुक्रवार को बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस मदन बी लोकुर, कुरियन जोसेफ, रंजन गोगोई और जे चेलामेश्वर ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में ‘चीजें सही नहीं चल रही हैं.’ उन्होंने यह भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के बारे में भारत के मुख्य न्यायाधीश (दीपक मिश्रा) को समझाने की उनकी कोशिशें नाकाम रही हैं.

इस बीच सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश ‘शक्तियों का दुरुपयोग’ कर रहे हैं, इसलिए (जजों की) यह अभूतपूर्व पहल हुई है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मुकुल मुदगल ने कहा कि जरूर कोई गंभीर वजह है, जिसने सुप्रीम कोर्ट के जजों के सामने प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के अलावा कोई दूसरे विकल्प नहीं छोड़ा था. उन्होंने आगे कहा, ‘जस्टिस लोया से इसका क्या संबंध? मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता और मैं किसी राजनीतिक मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता.’ सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज पीवी सावंत ने भी जजों के बीच गंभीर विवाद होने की आशंका जताई है.