आर्थिक मोर्चे पर केंद्र सरकार के लिए शुक्रवार का दिन मिला-जुला साबित हुआ है. केंद्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (सीएसओ) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक एक ओर दिसंबर में खुदरा महंगाई दर 17 महीनों के उच्चतम स्तर 5.21 फीसदी पर पहुंच गई है. दूसरी ओर उद्योगों की विकास दर मापने वाले औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में नवंबर में 8.4 फीसदी की जबरदस्त उछाल आई है. नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद ही नहीं बल्कि पिछले 25 माह में उद्योगों का यह सबसे तेज विकास है.

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर में कच्चे तेल और खाने-पीने के सामानों के महंगे होने से महंगाई दर में यह तेजी आई है. इससे पहले नवंबर में यह तेजी महज 4.88 फीसदी की थी. सीएसओ की रिपोर्ट के अनुसार नवंबर और दिसंबर महीनों की तुलना करें तो सिर्फ दाल के दाम में 0.6 फीसदी की मामूली गिरावट हुई जबकि सब्जियों के दामों में दिसंबर में 29.13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. सब्जियों के अलावा, अंडों और फलों के दामों में भी तेजी दर्ज हुई.

जानकारों के अनुसार महंगाई के ये आंकड़े केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक दोनों के लिए तनाव बढ़ाने वाला है. आरबीआई ने मौद्रिक नीति समिति की पिछली बैठक में अनुमान जताया था कि खुदरा महंगाई दर मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में 4.3 से 4.7 फीसदी के बीच रह सकती है. लेकिन दिसंबर 2017 के आंकड़े कुछ और ही संकेत दे रहे हैं. अगर खुदरा महंगाई नियंत्रित नहीं हो पाती तो आरबीआई को निकट भविष्य में अपनी प्र​मुख दरों में वृद्धि करनी पड़ सकती है. ऐसे में सस्ते लोन का सपना देख रहे लोगों को निराशा का सामना करना पड़ सकता है.