बीते शुक्रवार को केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) ने बताया कि दिसंबर में खुदरा महंगाई दर पिछले 17 महीनों में सबसे ज्यादा - 5.21 फीसदी - तक पहुंच गई. खुदरा उपभोक्ता सूचकांक (सीपीआई) के आंक​ड़े जारी करते हुए सीएसओ ने ये भी बताया कि महंगाई बढ़ने का मुख्य कारण खाने-पीने के सामानों का महंगा होना रहा है.

आम आदमी और सरकार दोनों को यह खबर परेशान कर सकती है. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के लिए भी यह किसी झटके से कम नहीं है जिसने मार्च तक इसे चार फीसदी तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा था. जानकारों के अनुसार इसके चलते अब फरवरी की समीक्षा बैठक में ब्याज दरों के घटने की संभावना पूरी तरह खत्म हो गई है. कुछ जानकार तो यहां त​क कह रहे हैं कि महंगाई ऐसे ही चढ़ती रही तो जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाई भी जा सकती हैं. वैसे यह खबर इसलिए भी चिंता बढ़ाने वाली है क्योंकि हाल-फिलहाल में ऐसा कम ही हुआ है जब खुदरा महंगाई आरबीआई के अनुमान के पार गई हो. आरबीआई ने अक्टूबर से मार्च के बीच इसके 4.3 से 4.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया था.

2018 की पहली छमाही में भी महंगाई परेशान कर सकती है

सीएसओ की रिपोर्ट के अनुसार डीजल-पेट्रोल के अलावा अंडे, प्याज और टमाटर की महंगाई बढ़ाने में सबसे ज्यादा भूमिका रही है. ईंधन को छोड़ दें तो बाकी चीजों के मार्च तक ही सस्ता होने की संभावना है. जानकारों के अनुसार ऐसे में एक-दो महीने बाद खुदरा महंगाई दर में कुछ आधार अंकों की कमी होना शुरू हो सकती है.

दूसरी ओर कई जानकारों का मानना है कि खुदरा महंगाई दर के निर्धारण में बेस इफेक्ट (पिछले साल की दर) का काफी असर होता है लिहाजा जून के बाद ही इसके घटने की संभावना है. पिछले साल जून में खुदरा महंगाई दर पांच साल के न्यूनतम स्तर - 1.54 फीसदी - तक जाने के बाद जुलाई से तेजी से बढ़ने लगी थी. आंकड़ों के अनुसार 2017 में अप्रैल से जून की ति​माही में खुदरा महंगाई दरों का औसत 2.24 फीसदी था. जुलाई से सितंबर और अक्टूबर से दिसंबर की तिमाहियों में ये आंकड़ा बढ़ता हुआ 3.00 और 4.56 फीसदी तक पहुंच गया था.

महंगाई बढ़ाने वाले और कारण भी हैं

1. जानकारों के अनुसार जब तक कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत नीचे नहीं आएगी, इसके घटने की कम ही संभावना है. हालांकि हाल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है जो अभी 70 डॉलर के करीब है. पिछले सात महीने में यह 54 फीसदी बढ़कर तीन साल के उच्चतम स्तर तक चला गया है. एक शोध की मानें तो इससे महंगाई दर लगभग आधा फीसदी बढ़ सकती है. सरकार के लिए यह स्थिति तनाव बढ़ाने वाली है.

2. हाल में केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि वह इस साल अपने वित्तीय घाटे के लक्ष्य को छोड़ सकती है. इससे अनुमान है कि मौजूदा वित्त वर्ष में यह 3.2 फीसदी के लक्ष्य के बजाय पिछले साल के 3.5 फीसदी के स्तर पर ही बरकरार रहेगा. राज्यों के मामले में भी मौजूदा वित्तीय वर्ष में वित्तीय घाटा 2.6 के बजाय तीन फीसदी रहने का अनुमान है. ऐसे में इस वित्त वर्ष में देश का कुल वित्तीय घाटा लक्ष्य से करीब 0.6 फीसदी ज्यादा (6.5 फीसदी तक) रहने का अनुमान है. इसका मतलब यह हुआ कि बाजार में पहले की योजना से करीब एक लाख करोड़ रुपये ज्यादा डाले जाएंगे. इससे अगले कई महीनों तक मांग और महंगाई दोनों के बढ़ने का अनुमान है.

3. केंद्र सरकार ने एक जुलाई, 2018 से सातवें वेतन आयोग के तहत लंबित आवासीय और अन्य भत्तों को देने की घोषणा कर दी है. मांग बढ़ाने वाले इस फैसले से भी खुदरा महंगाई के चढ़ते रहने की संभावना है.

4. इस साल मानसून के ज्यादा अच्छा न रहने से खरीफ और रबी दोनों फसलों का उत्पादन पिछले साल से कम रहने का अनुमान है. इससे अनाज और उद्योगों का कच्चे माल महंगा होने का अंदाजा लगाया जा रहा है.

5. अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व अगले छमाही में एक बार और ब्याज दर में चौथाई फीसदी की वृद्धि कर सकता है. इस चलते रुपये की तुलना में डॉलर के मजबूत होने और फिर आयात के महंगा होने से महंगाई के बढ़ने की आशंका है.