सुप्रीम कोर्ट के चार जजों की बग़ावत का मामला राजनीतिक रूप भी ले सकता है. द एशियन एज़ के मुताबिक़ विपक्ष की कुछ पार्टियां अब सीजेआई (भारत के मुख्य न्यायाधीश) दीपक मिश्रा के ख़िलाफ़ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही हैं. इनमें कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दल शामिल हैं.

सूत्रों के मुताबिक़ बजट सत्र में विपक्ष इस मसले पर सरकार से विरोध जताने के लिए सीजेआई के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव पेश कर सकता है. हालांकि यह प्रस्ताव होगा सांकेतिक ही क्योंकि संसद में विपक्ष के पास इतना संख्या बल नहीं है कि वह महाभियोग प्रस्ताव पारित करा सके. यहां तक कि विपक्ष लोक सभा में भी महाभियोग प्रस्ताव पेश करने की स्थिति में नहीं है. क्योंकि वहां इस प्रस्ताव पर पहले 100 सांसदों के दस्तख़त कराने पड़ेंगे. ऐसे में सिर्फ़ राज्य सभा में ही प्रस्ताव पेश किए जाने की संभावना बन सकती है. वहां प्रस्ताव पेश करने के लिए 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं. हालांकि राज्य सभा में प्रस्ताव पर बहस होना या न होना इस पर निर्भर करेगा कि सभापति उसे मंज़ूरी देते हैं या नहीं. फिर भी प्रतीकात्मक रूप से प्रस्ताव पेश करने मात्र से विपक्ष अपना मक़सद तो हासिल कर ही सकता है.

सूत्र बताते हैं कि विपक्ष की इस तैयारी के पीछे वह राजनीतिक वजह है जो जजों की बग़ावत का कारण भी बताई जा रही है. इस बाबत टाइम्स ऑफ इंडिया की मानें तो सुप्रीम कोर्ट के जजों की बग़ावत का तात्कालिक कारण जस्टिस बीएच लोया की मौत से जुड़ा मसला था. विशेष सीबीआई अदालत के जज जस्टिस लोया गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख़ फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे थे. इसमें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी आरोपित हैं. जस्टिस लोया की नागपुर में एक दिसंबर 2014 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी. और इसके कुछ दिन बाद ही शाह को मामले से आरोपमुक्त कर दिया गया था. ख़बर के मुताबिक़ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस गुरुवार को एक जनहित याचिका स्वीकार की थी. इस याचिका में जस्टिस लोया की मौत की जांच की मांग की गई है.

बताया जाता है कि बग़ावत करने वाले चारों जज इस याचिका को सुनवाई के लिए एक विशेष बेंच को भेजने की मांग कर रहे थे. लेकिन सीजेआई मिश्रा ने उनकी मांग ख़ारिज़ कर दी. इस दलील के साथ कि याचिका किस बेंच को भेजनी है यह तय करने का अधिकार सीजेआई को है. इसके बाद सीजेआई ने यह याचिका सुनवाई के लिए जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के पास भेज दी. जबकि जस्टिस अरुण मिश्रा सुप्रीम कोर्ट के 25 जजाें के वरिष्ठता क्रम में 10वें नंबर पर आते हैं. वहीं जो जज सीजेआई के पास अपनी बात रखने गए थे वे वरिष्ठता के हिसाब से दो से पांच नंबर पर हैं. इनमें जस्टिस रंजन गोगोई तो देश के अगले मुख्य न्यायाधीश बन सकते हैं. लेकिन उनकी बात को सीजेआई द्वारा तवज्ज़ाे न दिए जाने से मामला बिगड़ गया और बात जजों द्वारा सीधे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने तक पहुंच गई.