सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों की शीर्ष अदालत को बचाने की अपील के बाद देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों के बयान सामने आ रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक शुक्रवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर हैरानी जताते हुए इन पूर्व न्यायाधीशों और मुख्य न्यायाधीशों (सीजेआई) का कहना है कि सरकार को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए. उनके मुताबिक मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को इस संकट का समाधान निकालना चाहिए.

पूर्व सीजेआई आरएम लोढ़ा ने सवाल करते हुए कहा कि यह मुद्दा दो महीने तक कैसे बना रह सकता है. उन्होंने कहा, ‘जो हुआ उससे मैं परेशान हूं. यह ऐसे व्यक्ति के लिए दुर्भाग्यपूर्ण और दर्दनाक है जिसने सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था का संचालन किया था.’ पूर्व सीजेआई ने कहा कि चारों वरिष्ठ जजों ने दो महीने पहले मुद्दों को उठाया था. साफ है कि मुख्य न्यायाधीश को उनसे बात कर उन मुद्दों को देखना चाहिए था. जस्टिस लोढ़ा ने कहा, ‘आखिरकार सीजेआई (दीपक मिश्रा) को ही इस संस्था के अगुआ के रूप में समझदारी दिखाते हुए उन शिकायतों को दूर करना होगा. इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है. यह न्यायपालिका का अंदरूनी मामला है और उसे ही इसका हल निकालना चाहिए.’

पूर्व सीजेआई के जी बालाकृष्णन ने कहा कि शुक्रवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद लोगों की नजरों में सुप्रीम कोर्ट की विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी. उन्होंने कहा कि अगर यह संकट आगे भी जारी रहा तो लोकतंत्र का आधार नहीं रहेगा. जस्टिस बालाकृष्णन ने कहा, ‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है. दुनिया की किसी भी अन्य शीर्ष अदालत ने इस तरह से काम नहीं किया. अगर कोई समस्या थी तो उन्हें (चारों वरिष्ठ जज) बात कर उसे सुलझाना चाहिए था. वे देश के सर्वोच्च न्यायाधीश हैं. इस मामले को लोगों के बीच ले जाने का क्या मतलब है?’

जस्टिस बालाकृष्णन ने कहा कि मामले किस पीठ को जाएं, इसका अधिकार सीजेआई के पास है, लेकिन ऐसा (किसी के द्वारा) प्रेरित होकर नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि काम के बंटवारे को लेकर इन जजों के दिमाग में शक क्यों पैदा हुआ.’ जस्टिस आर एम लोढ़ा की तरह जस्टिस बालाकृष्णन ने भी इसमें सरकार द्वारा दखल न देने की बात की. उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती. वहीं, सुप्रीम के पूर्व न्यायाधीश के टी थॉमस ने कहा कि चारों जजों का प्रेस कॉन्फ्रेंस करना एक मिसाल नहीं बनना चाहिए. सरकार की भूमिका को लेकर उन्होंने कहा, ‘अगर सरकार समझदार है तो उसे इस संकट से दूरी रखनी चाहिए.’