हो सकता है आने वाले दिनों में सब्जियां भी एमआरपी (अधिकतम फुटकर मूल्य) पर मिलने लगें. आगामी बजट पर हुई रायशुमारी के दौरान केंद्र की नरेद्र मोदी सरकार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने इस तरह का सुझाव दिया है.

लोक सभा के लिए 2019 में हाेने वाले चुनाव से पहले मोदी सरकार इस बार एक फरवरी को आखिरी पूर्ण बजट पेश करेगी. इसीलिए इस बजट में आम लोगों के लिए तमाम छूटाें और कल्याणकारी योजनाओं को शामिल किया जाना तय माना जा रहा है. डीएनए की ख़बर के मुताबिक़ ऐसी योजनाअों में एक सब्जियों का एमआरपी तय करना भी हो सकता है. सरकार ने अगर इस योजना को लागू किया तो किसानों को सब्जियों के तयशुदा दाम मिल सकेंगे. वहीं आम लोगों को सब्जियों के दामाें में अक्सर होने वाली अनावश्यक बढ़त से मुक्ति मिलेगी.

बीकेएस के राष्ट्रीय सचिव मोहिनीमोहन मिश्रा ने संगठन की ओर से सरकार को दिए गए इस सुझाव की पुष्टि की. उन्होंने कहा, ‘सरकार को सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों पर प्राइस कैप (एमआरपी जैसा) लगाना होगा. यह बहुत अन्यायपूर्ण है कि किसान तो टमाटर पांच रुपए किलो में बेचें लेकिन मंडी में जाकर वह 30 रुपए प्रति किलो में बेचा जाए. फिर वही टमाटर उपभोक्ता के हाथ में पहुंचे तो उसकी कीमत 50 रुपए किलो हो जाए.’ बता दें कि अब तक पंजाब और हरियाणा में सब्जियों जैसे उत्पादों के लिए एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की व्यवस्था लागू है.