ईरान ने 2015 के परमाणु समझौते में किसी भी बदलाव को मानने से इनकार कर दिया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘हम परमाणु समझौते में किसी भी बदलाव को स्वीकार नहीं करेंगे, चाहे वह आज हो या बाद में हो.’ ईरान ने यह भी कहा कि वह 2015 के इस परमाणु समझौते में किसी दूसरे मुद्दे को नहीं शामिल करने देगा.

ईरान का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस परमाणु समझौते को बनाए रखने के लिए इसे प्रमाणित करने के बाद इसमें बदलाव की मांग करने पर आया. इस समझौते के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को प्रत्येक 90 दिन पर यह प्रमाणित करना होता है कि ईरान इसकी शर्तों को मान रहा है. हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘यूरोपीय सहयोगियों को इस समझौते की विनाशकारी खामियों को दूर करने के लिए अमेरिका के साथ काम करना चाहिए, नहीं तो अमेरिका इससे अलग हो जाएगा.’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के तुरंत बाद ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने कहा कि 2015 के परमाणु समझौते पर दोबारा बात नहीं हो सकती. उन्होंने यह भी कहा, ‘अमेरिका को बयानबाजी करने के बजाए इस समझौते की शर्तों को मानने पर ध्यान देना चाहिए.’

ईरान के साथ 2015 में हुए इस परमाणु समझौते में सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी देश (अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जर्मनी और रूस) शामिल हैं. इसके तहत ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम रोक दिया था, जिसके बदले में अन्य देशों ने उस पर लगे प्रतिबंधों को हटा लिया था.