क्यों इस साल की तीसरी तिमाही में आईटी सेक्टर के नतीजे उत्साहजनक नहीं रहने वाले हैं | सोमवार, 08 जनवरी 2018

इस साल की तीसरी तिमाही में आईटी सेक्टर के नतीजे उम्मीद के मुताबिक़ नहीं रहने की संभावना जताई जा रही है. इसकी वजह है बैंकिंग और रिटेल सेक्टर में आई मंदी. माना जा रहा है कि टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो और टेक महिंद्रा जैसे क्षेत्र के सभी बड़े दिग्गजों को इस मंदी का असर झेलना पड़ सकता है.

देश की आईटी कंपनियों की बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा क्षेत्र पर काफी निर्भरता है. मिसाल के तौर पर इन्फोसिस की आय का लगभग 33 फीसदी हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों से आता है. जाहिर सी बात है कि इन क्षेत्रों की मंदी का असर इन पर पड़ना ही पड़ना है.

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को माओवादियों ने अपना दुश्मन नंबर-एक क्यों मान लिया है? | मंगलवार, 09 जनवरी 2018

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और उनकी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को माओवादियों ने अपना दुश्मन नंबर-एक बताया है. साथ में यह कहा है कि केरल में ‘अघोषित आपातकाल’ लागू है. हालांकि दिलचस्प बात यह भी है कि केरल के सत्ताधारी वामगठबंधन पिनराई सरकार में शामिल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) पर माओवादियों ने कोई आरोप नहीं लगाया है.

एक खबर के मुताबिक़ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े संगठन डब्ल्यूजीएसज़ेडसी (वेस्टर्न घाट स्पेशल ज़ोन कमेटी) ने आरोप लगाया है कि पिनराई सरकार ने माओवादियों के ख़िलाफ़ हमले बढ़ाए हैं. संगठन के मुखपत्र ‘कम्युनिस्ट’ में पिनराई विजयन की तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की गई है. साथ ही कहा गया है, ‘इतिहास अपने आप को दोहरा रहा है. इससे पहले भी माकपा ने आंदोलनकारी ताकतों (माओवादियों) के ख़िलाफ़ इंदिरा गांधी सरकार की सैन्य आक्रामकता का समर्थन किया था. और आज वह वैसे ही केंद्र की भाजपा सरकार का साथ दे रही है.’

गठबंधन की कवायद समय की बर्बादी, 2019 में सपा अकेले लड़ेगी : अखिलेश यादव | बुधवार, 10 जनवरी 2018

समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने फिलहाल कांग्रेस के साथ आगे किसी गठबंधन की संभावना से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा है कि उनकी पहली प्राथमिकता पार्टी संगठन को मजबूत करना है. पीटीआई के साथ एक साक्षात्कार में अखिलेश यादव ने कहा, ‘2019 का चुनाव निश्चित रूप से अहम है क्योंकि उत्तर प्रदेश से निकलने वाला संदेश पूरे देश में जाएगा. इसमें (गठबंधन और सीटों पर माथापच्ची) काफी समय बर्बाद होता है और मैं किसी असमंजस में नहीं रहना चाहता.’

हालांकि अखिलेश यादव ने कहा कि बाद में किसी सही समय पर गठबंधन के बारे में सोचा जा सकता है लेकिन इस समय उनकी प्राथमिकता पार्टी संगठन मजबूत करना है. उनके मुताबिक उनकी राजनीति का स्टाइल अलग है और समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ आने में उन्हें परहेज नहीं है.

चारा घोटाला : सीबीआई जज से लालू यादव की कथित सिफारिश करने वाले जिलाधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश | गुरूवार, 11 जनवरी 2018

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के जज को प्रभावित करने के आरोपों की जांच का आदेश दे दिया है. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार इस मामले में जालौन के जिलाधिकारी मन्नान अख्तर पर जज शिवपाल सिंह को फोन करने और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की सजा घटाने की सिफारिश करने का आरोप लगा है.

रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने झांसी के कमिश्नर अमित गुप्ता को इन आरोपों की जांच करने और जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. उधर, जिलाधिकारी मन्नान अख्तर ने इन आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने कहा, ‘मेरी फोन पर उनसे कभी बात नहीं हुई...जिस तारीख में फोन करने की बात कही जा रही है, उस दौरान मैं छुट्टियों पर असम में अपने गृहनगर में था.’

पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार जज मीडिया में आए, शीर्ष अदालत को बचाने की अपील की | शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

स्वतंत्र भारत और सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार शीर्ष अदालत के चार जजों ने मीडिया के सामने आकर पूरे देश से सुप्रीम कोर्ट को बचाने की अपील की ताकि देश में लोकतंत्र बचा रह सके. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक शुक्रवार को जस्टिस मदन बी लोकुर, कुरियन जोसेफ, रंजन गोगोई और जे चेलामेश्वर ने जस्टिस जे चेलामेश्वर के सरकारी आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इन चारों जजों की तरफ से जस्टिस जे चेलामेश्वर ने कहा, ‘हमारी संस्था (सुप्रीम कोर्ट) और देश के लिए जिम्मेदारी है. सीजेआई (भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा) को इस संस्था (सुप्रीम कोर्ट) की रक्षा के लिए कदम उठाने के बारे में समझाने की हमारी कोशिशें नाकाम रही हैं.’

जस्टिस जे चेलामेश्वर ने आगे कहा, ‘हम लोग आज (शुक्रवार) सुबह ही भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलने गए और उन्हें समझाने की कोशिश की कि कुछ चीजें सही नहीं हैं और इन्हें सुधारने के लिए उनको कदम उठाना चाहिए. दुर्भाग्य से हम उन्हें नहीं समझा पाए.’ उन्होंने आगे कहा, ‘हम सब (चारों जज) मानते हैं कि जब तक इस संस्था (सुप्रीम कोर्ट) की रक्षा नहीं की जाती है और इसकी गंभीरता को बनाए नहीं रखा जाता है, इस देश में या किसी भी देश में लोकतंत्र नहीं बच पाएगा.’

सरकारी बैंकों के एक लाख करोड़ रु उनके पास फंसे हैं जो सक्षम होते हुए भी लोन नहीं चुका रहे | शनिवार, 13 जनवरी 2018

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की फंसी हुई रकम (एनपीए) में 14 फीसदी भागीदारी उन डिफ़ाल्टरों की है जिनके पास लोन चुकाने के पर्याप्त संसाधन हैं, पर वे रकम लौटाना नहीं रहे. यह आंकड़ा करीब एक लाख करोड़ रुपए बैठता है. अंग्रेजी में इन्हें ‘विलफुल डिफ़ाल्टर’ कहा जाता है. भारत के कुल 21 बड़े सरकारी बैंकों का लगभग 7.33 लाख करोड़ रुपया एनपीए की श्रेणी में है. अर्थशास्त्र की भाषा में यह वह राशि है जो देश की अर्थव्यवस्था में काम नहीं आ रही. यानी, फंसी हुई रकम.

सरकारी बैंकों ने कुल मिलाकार 9025 डिफ़ाल्टरों की एक लिस्ट जारी की है. इनमें विजय माल्या भी हैं. इनमें से 8423 डिफाल्टरों पर बैंकों ने क़ानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. इसके अलावा 1968 डिफाल्टरों के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज़ करायी गई है. इन पर लगभग 31 हज़ार करोड़ रु बकाया हैं. वहीं, लगभग 87 हज़ार करोड़ रु लेकर बैठे हुए 6937 व्यक्तियों और कंपनियों की संपत्तियां ज़ब्त करने और उन्हें बेचकर पैसा वसूलने की क़वायद शुरू हो चुकी है.